स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के शिल्पकार राम सुतार का 100 वर्ष की उम्र में निधन, कला जगत में शोक की लहर

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के शिल्पकार राम सुतार का 100 वर्ष की उम्र में निधन, कला जगत में शोक की लहर
JHB TEAM JHBNEWS टीम,सूरत 2025-12-18 12:59:55

विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के शिल्पकार और पद्म भूषण से सम्मानित राम सुतार का 100 वर्ष की उम्र में नोएडा में निधन हो गया। उन्होंने अनेक प्रसिद्ध और ऐतिहासिक मूर्तियों का निर्माण किया। कहा जाता है कि जिस पत्थर को राम सुतार स्पर्श करते थे, वह एक अद्भुत कलाकृति में बदल जाता था। करीब 67 वर्ष पहले वे महाराष्ट्र से दिल्ली आए थे और यहीं बस गए थे। उनके पुत्र अनिल सुतार ने उनके निधन की जानकारी दी।

अनिल सुतार के अनुसार, “मेरे पिता राम वंजी सुतार का 17 दिसंबर की मध्यरात्रि हमारे निवास स्थान पर निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार और अन्य धार्मिक विधियां 18 दिसंबर को संपन्न होंगी।”

राम सुतार का जन्म 19 फरवरी 1925 को महाराष्ट्र के धुले जिले के गोंडूर गांव में एक साधारण बढ़ई परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनकी कला में गहरी रुचि थी। उनकी प्रतिभा को गुरु रामकृष्ण जोशी ने पहचाना और उन्हें मुंबई की प्रतिष्ठित जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट्स में प्रवेश लेने के लिए प्रेरित किया। यहीं से उनकी मूर्तिकला की यात्रा शुरू हुई, जिसने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।

सरकारी नौकरी छोड़कर मूर्तिकला को बनाया जीवन

वर्ष 1959 में राम सुतार दिल्ली आए और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में नौकरी शुरू की। लेकिन कला के प्रति उनका समर्पण इतना गहरा था कि कुछ समय बाद उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह मूर्तिकला को ही अपना जीवन बना लिया। 1961 में गांधीसागर डैम पर देवी चंबल की 45 फीट ऊंची प्रतिमा ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई। इसके बाद संसद भवन परिसर में गोविंद वल्लभ पंत की आदमकद प्रतिमा सहित अनेक महत्वपूर्ण कृतियों का निर्माण उन्होंने किया।

राम सुतार कौन थे?

19 फरवरी, 1925 को महाराष्ट्र के वर्तमान धुले जिले के गोंदुर गांव में एक साधारण परिवार में जन्मे राम सुतार को बचपन से ही मूर्तिकला में रुचि थी। मुंबई के जेजे स्कूल ऑफ आर्ट एंड आर्किटेक्चर से स्वर्ण पदक विजेता राम सुतार के नाम कई उपलब्धियां दर्ज हैं। संसद परिसर में महात्मा गांधी की ध्यान मुद्रा में और छत्रपति शिवाजी की अश्वारोही प्रतिमाएं उनकी उत्कृष्ट कृतियों में से हैं। उन्होंने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का भी डिजाइन तैयार किया, जो देश के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार पटेल को समर्पित है। राम सुतार को 1999 में पद्म श्री और 2016 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। हाल ही में, उन्हें राज्य के सर्वोच्च पुरस्कार, महाराष्ट्र भूषण से भी सम्मानित किया गया है।


राम सुतार द्वारा बनाई गई प्रमुख मूर्तियां

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी: गुजरात के केवड़िया में स्थित यह विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा है, जो सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित है। इसकी ऊंचाई 182 मीटर है।

महात्मा गांधी की मूर्तियां: राम सुतार ने महात्मा गांधी की 350 से अधिक मूर्तियां बनाई हैं, जो दुनिया भर में स्थापित हैं।

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की मूर्तियां: उन्होंने डॉ. आंबेडकर की कई प्रतिमाएं बनाई हैं, जिनमें मुंबई के चैत्यभूमि में स्थित प्रतिमा प्रमुख है।

भगवान शिव की प्रतिमा: बेंगलुरु में स्थित 153 फीट ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा भी उनकी प्रमुख कृतियों में शामिल है।

छत्रपति संभाजी महाराज की प्रतिमा: पुणे में स्थित 100 फीट ऊंची छत्रपति संभाजी महाराज की प्रतिमा का निर्माण भी उन्होंने किया था।

अनेक पुरस्कारों से हुए सम्मानित

राम सुतार को उनके अतुलनीय योगदान के लिए पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। वर्ष 2019 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया था। इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार ने भी उन्हें महाराष्ट्र भूषण से सम्मानित किया था।