'टूटी इमारत, टुटा बाथरूम, बिखरा बच्चो का भविष्य': सूरत में DEO ने इस हिंदी विद्यालय की मान्यता रद्द
सूरत शहर में शिक्षा जगत को शर्मसार करती एक और गंभीर घटना सामने आई है, जहां छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करती और बिना आवश्यक सुविधाओं के चल रही एक ग्रांटेड स्कूल पर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने कड़ी कार्रवाई की है। भेसाण रोड पर स्थित प्रेमभारती साकेत हिंदी विद्यालय में DEO की अचानक हुई निरीक्षण के बाद स्कूल की मान्यता रद्द करने का बड़ा निर्णय लिया गया है।
जर्जर भवन, टूटी खिड़कियाँ–दरवाज़े, भयावह स्थिति
जब जिला शिक्षा अधिकारी की टीम ने भेसाण रोड स्थित इस विद्यालय की सरप्राइज़ विज़िट की, तो वहां के दृश्य देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। स्कूल किसी शिक्षा संस्थान की तरह नहीं, बल्कि एक जर्जर खंडहर जैसी हालत में थी। खिड़कियाँ और दरवाज़े टूटी हालत में लटक रहे थे, जबकि कक्षाओं में फ़्लोरिंग भी ढंग की नहीं थी। सबसे गंभीर बात यह थी कि इसी खस्ताहाल और खतरनाक इमारत में बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जा रहा था, जो सीधे-सीधे विद्यार्थियों की जान से खिलवाड़ था।
बच्चे दयनीय परिस्थितियों में पढ़ने को मजबूर
ग्रांटेड स्कूलों को सरकार द्वारा छात्रों की सुविधाओं के लिए धनराशि दी जाती है, फिर भी इस स्कूल में पीने का साफ पानी, पंखे जैसी बेसिक सुविधाएँ भी मौजूद नहीं थीं। इतना ही नहीं, छात्रों के लिए शौचालय और बाथरूम जैसी अनिवार्य सुविधाओं का भी पूरी तरह अभाव था। ऐसी दयनीय स्थिति में बच्चे मजबूरी में पढ़ने को विवश थे।
छात्र संख्या में हेराफेरी कर सरकारी लाभ लेने की कोशिश
निरीक्षण के दौरान स्कूल की प्रशासनिक गड़बड़ियाँ भी उजागर हुईं। रिकॉर्ड में छात्रों की संख्या 36 दिखाई गई थी, जबकि प्रतिदिन केवल 20–21 बच्चे ही उपस्थित पाए गए। पहली परीक्षा में भी 36 में से कई छात्र अनुपस्थित थे। इससे स्पष्ट है कि फर्जी संख्या दिखाकर स्कूल प्रबंधन सरकारी लाभ लेने का प्रयास कर रहा था।
कई चेतावनियों के बाद भी सुधार नहीं, इसलिए मान्यता रद्द
अधिकारियों ने बताया कि पिछले वर्ष भी स्कूल के वर्ग बंद किए गए थे, लेकिन प्रबंधन के अपील करने के बाद एक वर्ष के लिए शर्तों के साथ स्कूल को पुनः शुरू रखने की अनुमति दी गई थी। परंतु, किसी भी तरह का सुधार न होने और छात्र संख्या में धांधली पकड़े जाने के बाद इस वर्ष तात्कालिक प्रभाव से कक्षाएँ बंद कर स्कूल की मान्यता रद्द कर दी गई है। DEO कार्यालय पहले भी कई बार नोटिस जारी कर चुका था, लेकिन प्रबंधन ने कोई सुधार नहीं किया। अंततः छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह कठोर कदम उठाया गया है।