इस साल अब तक मराठवाड़ा में 899 किसान कर चुके हैं आत्महत्या, बाढ़ और फसल खराब होना है प्रमुख वजह

इस साल अब तक मराठवाड़ा में 899 किसान कर चुके हैं आत्महत्या, बाढ़ और फसल खराब होना है प्रमुख वजह
Anjali Singh JHBNEWS टीम,सूरत 2025-11-19 12:25:14

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में इस साल जनवरी से अक्टूबर के बीच 899 किसानों ने आत्महत्या की। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इनमें से 537 किसानों ने बाढ़ और भारी फसल क्षति के कारण छह महीनों में अपनी जान गंवाई।

कृषि राज्य मंत्री आशीष जायसवाल ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रही है और समर्पित योजनाओं व प्रोत्साहनों पर खर्च बढ़ाकर एक लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। छत्रपति संभाजीनगर संभागीय आयुक्तालय द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, इस साल जनवरी से अक्टूबर तक दस महीनों में मराठवाड़ा में 899 किसानों ने आत्महत्या की, जिनमें से 537 किसानों ने छह महीनों (1 मई से 31 अक्टूबर के बीच) के दौरान आत्महत्या की।


इस दौरान बारिश और बाढ़ ने कहर बरपाया। बीड और छत्रपति संभाजीनगर ज़िलों में सबसे ज़्यादा किसान आत्महत्याएँ दर्ज की गईं। ज़िलेवार, छत्रपति संभाजीनगर में 112, जालना में 32, परभणी में 45, हिंगोली में 33, नांदेड़ में 90, बीड में 108, लातूर में 47 और धाराशिव में 70 आत्महत्याएँ दर्ज की गईं।

सरकार ने मुआवजे की घोषणा की

राज्य सरकार ने मराठवाड़ा के प्रभावित किसानों के लिए लगभग 32,000 करोड़ रुपये के मुआवज़े के पैकेज की घोषणा की है। नांदेड़, परभणी, हिंगोली, लातूर, बीड और धाराशिव ज़िलों में बाढ़ और भारी बारिश के कारण (20 सितंबर तक के रिकॉर्ड के अनुसार) भारी नुकसान हुआ है, जिसमें 12 मौतें, 1300 घरों का नुकसान और 357 मवेशियों की मौत शामिल है।

किसान नेता और पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने आत्महत्या पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि बेमौसम बारिश और लंबे मानसून के बाद आई बाढ़ ने बागवानी फसलों और अन्य कृषि को भारी नुकसान पहुँचाया है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति ने मराठवाड़ा के किसानों का मनोबल तोड़ दिया है।

पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने आरोप लगाया कि किसानों को फसल नुकसान का बहुत कम मुआवज़ा मिला है। उन्होंने एक केले के किसान का उदाहरण दिया जिसने एक व्यापारी से 25,000 रुपये प्रति टन के हिसाब से 100 टन फसल का सौदा किया था, लेकिन सिना नदी में बाढ़ आने से उसकी पूरी फसल बर्बाद हो गई। सरकार ने उसे सिर्फ़ 25,000 रुपये का मुआवज़ा दिया, और ऐसे कई मामले हैं।

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