सूरत के चर्चित नासीरनगर डिमोलिशन मामले में निगम के 5 इंजीनियर निलंबित
गुजरात के सूरत शहर में नासीरनगर झुग्गी बस्ती में करीब 80 मकानों को गिराए जाने का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। घटना को तीस से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि डिमोलिशन की कार्रवाई किसके निर्देश पर की गई थी। सूरत नगर निगम (एसएमसी) ने इस कार्रवाई में अपनी किसी भी प्रत्यक्ष भूमिका से इनकार किया है, जबकि प्रभावित स्थानीय निवासियों ने इसे अवैध बताते हुए गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सूरत नगर निगम ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं। दूसरी ओर, विपक्षी कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि यह कार्रवाई सत्तारूढ़ भाजपा के इशारे पर एक निजी बिल्डर को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से कराई गई। कांग्रेस का दावा है कि इस पूरे मामले में कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की भी भूमिका हो सकती है।
जांच के लिए गठित विशेष समिति ने अपनी रिपोर्ट नगर निगम को सौंप दी है। रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों और निष्कर्षों को ध्यान में रखते हुए सूरत महानगरपालिका ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरी हो सके, इसके लिए संबंधित अधिकारियों को उनके पदों से हटाने का निर्णय लिया गया है।
इस कार्रवाई के तहत कार्यपालक अभियंता (सिविल) सुजलकुमार धरमशी प्रजापति और जयंग रजनीकांत जीवनरामजीवाला, डिप्टी इंजीनियर अर्पण मनसुखलाल परमार, सहायक अभियंता मोनिक बाबू गढ़िया तथा जूनियर इंजीनियर नरेश कुमार बीनल गलचर सहित कुल पांच अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
सूरत महानगरपालिका के इस फैसले को नासीरनगर डिमोलिशन मामले में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब विभागीय जांच पूरी होने के बाद दोषियों की जिम्मेदारी तय कर आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।