सूरत : टंकी गिरने के मामले में डिप्टी और तत्कालीन एग्जीक्यूटिव इंजीनियर सस्पेंड, पेमेंट भी रोका गया
गुजरात : दक्षिण गुजरात के सूरत जिले के अरेथ तालुका के ताड़केश्वर गांव में बन रही पानी की टंकी गिरने की घटना ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी है। भ्रष्टाचार की पोल खोल के तौर पर देखी जा रही इस घटना में आखिरकार प्रशासन ने सख्त कार्रवाई का सिलसिला शुरू कर दिया है। 21 करोड़ रुपये की भारी लागत से तैयार हुई इस पानी की टंकी की टेस्टिंग के दौरान हुए हादसे के बाद राज्य सरकार और संबंधित विभाग ने दो जिम्मेदार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है।
टॉप इंजीनियर पकड़े गए
घटना की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने जिम्मेदार अधिकारियों की तुरंत पहचान कर उन्हें सस्पेंड करने के आदेश जारी किए हैं। जिसमें डिप्टी एग्जीक्यूटिव इंजीनियर जय चौधरी को ड्यूटी में लापरवाही के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। इसके अलावा, तत्कालीन एग्जीक्यूटिव इंजीनियर रजनीकांत चौधरी को भी सस्पेंड कर दिया गया है। पहली नज़र में पाया गया है कि ये दोनों बड़े अधिकारी प्रोजेक्ट की क्वालिटी और सुपरविज़न में फेल रहे।
कॉन्ट्रैक्टर और कंसल्टेंट के खिलाफ सख्त एक्शन लिया गया है।
सिर्फ सरकारी अधिकारियों पर ही नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट से जुड़ी प्राइवेट एजेंसियों पर भी एक्शन लिया गया है। टैंक बनाने वाले कॉन्ट्रैक्टर और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (PMC) को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इतना ही नहीं, सरकार ने सभी संबंधित एजेंसियों को सभी तरह के फाइनेंशियल पेमेंट तुरंत रोक दिए हैं। जांच पूरी होने तक यह पैसा जारी नहीं किया जाएगा।
टेस्टिंग में ही भ्रष्टाचार सामने आ गया!
गौरतलब है कि यह पानी की टंकी आसपास के 33 गांवों को साफ पीने का पानी देने के मकसद से बनाई गई थी। 11 लाख लीटर की बड़ी कैपेसिटी वाली इस टंकी के उद्घाटन से पहले टेस्टिंग का काम चल रहा था। जब टंकी में करीब 9 लाख लीटर पानी भर गया, तो टंकी ताश के पत्तों की तरह ढह गई। ऐसी स्थिति पैदा हो गई है कि 21 करोड़ की लागत पानी में चली गई है। स्थानीय लोगों में बहुत गुस्सा है क्योंकि यह टंकी उनके लिए लाइफलाइन की तरह थी।
घटना के बाद, सबसे ऊंचे लेवल से डिपार्टमेंटल जांच के आदेश दिए गए हैं। कई सरकारी एजेंसियां और लैब की टीमें मौके पर पहुंचकर सीमेंट, कंक्रीट और लोहे के सैंपल ले चुकी हैं। हालांकि, इस जांच के दौरान एक अजीब नज़ारा भी देखने को मिला। जब मीडिया टीम जांच करने वाले अधिकारियों के पास पहुंची, तो वे कैमरों और सवालों से बचने के लिए भागते हुए दिखे। मीडिया को देखकर अधिकारी वहां से भागते हुए पकड़े गए, जिससे सिस्टम के काम करने के तरीके पर फिर से सवाल उठ रहे हैं।