वंदे भारत 4.0 के लिए रेलवे की तैयारी, 2027 तक 250 kmph की स्पीड से चलेंगी ट्रेनें
इंडियन रेलवे अब एक ऐतिहासिक बदलाव के मुहाने पर है। देश में सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनों की सफलता के बाद, रेल मंत्रालय अब वंदे भारत 4.0 लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। अगली पीढ़ी की ट्रेन 250 kmph की अधिकतम स्पीड से चल सकेगी, जिससे भारत दुनिया के सबसे तेज़ रेलवे नेटवर्क वाले देशों में शामिल हो जाएगा।
वंदे भारत यात्रा: 2019 से 2047 तक का टारगेट
रेलवे के रोडमैप के मुताबिक, वंदे भारत ट्रेनों को लगातार अपग्रेड किया जा रहा है। पहली सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनसेट फरवरी 2019 में लॉन्च की गई थी। सितंबर 2022 में सेफ्टी फीचर्स को बढ़ाया गया। फिर 2025 में एनर्जी एफिशिएंसी और पैसेंजर सुविधाओं में सुधार किया गया। स्लीपर वेरिएंट 2026 में लॉन्च किया जाएगा। यह एक लंबी दूरी की ट्रेन होगी जो रात में भी चलेगी। चौथा वर्शन 2027 में लॉन्च होगा, जिसकी मैक्सिमम स्पीड 250 km/h होगी। 2047 तक पूरे देश में 4,500 वंदे भारत ट्रेनें चलाने का टारगेट है।
कवच 5.0 और स्टेट-ऑफ-द-आर्ट सेफ्टी फीचर्स
वंदे भारत 4.0 न सिर्फ स्पीड में, बल्कि सेफ्टी में भी वर्ल्ड-क्लास होगी। कवच 5.0 भारत का स्वदेशी 'ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन' सिस्टम है। यह ट्रेनों को टकराने से रोकता है, सिग्नल जंप होने पर ऑटोमैटिक ब्रेक लगाता है और ओवरस्पीडिंग को कंट्रोल करता है। ब्रेक लगाने के दौरान एनर्जी जेनरेट करने और उसे वापस ग्रिड में भेजने के सिस्टम से काफी एनर्जी बचेगी।
यह टेक्नोलॉजी ब्रेक लगाने के दौरान एनर्जी जेनरेट करती है, जिसे फिर वापस ग्रिड में भेजा जाता है, जिससे काफी एनर्जी बचती है। इसमें सेमी-परमानेंट कपलर और बेहतर सस्पेंशन का इस्तेमाल होता है, जिससे यह पक्का होता है कि पैसेंजर को तेज स्पीड पर भी कोई झटका न लगे।
यात्रियों के लिए फाइव-स्टार सुविधाएं
वंदे भारत 4.0 में हवा को डिसइंफेक्ट करने के लिए एक देसी UV-C लैंप-बेस्ड डिसइंफेक्शन सिस्टम होगा। पूरी तरह से सीलबंद गैंगवे और सेंट्रली कंट्रोल्ड ऑटोमैटिक प्लग दरवाज़े। खास तौर पर डिज़ाइन किए गए टॉयलेट और बैठने की व्यवस्था। हर कोच में सिक्योरिटी कैमरे और क्रू से बातचीत करने के लिए एक इमरजेंसी यूनिट है।
हाई-स्पीड कॉरिडोर पर फोकस
यह 4.0 वर्शन खास तौर पर मुंबई-अहमदाबाद जैसे डेडिकेटेड हाई-स्पीड कॉरिडोर के लिए डिज़ाइन किया जा रहा है। रेल मंत्रालय के अनुसार, वंदे भारत नेटवर्क भविष्य में भारत की लाइफलाइन साबित होगा और यात्रा के समय को काफी कम कर देगा।