SC ने जस्टिस वर्मा को दिया बड़ा झटका, 'अदालत ने महाभियोग के खिलाफ याचिका की खारिज

SC ने जस्टिस वर्मा को दिया बड़ा झटका, 'अदालत ने महाभियोग के खिलाफ याचिका की खारिज
khushbu Rajput JHBNEWS टीम,सूरत 2026-01-16 15:03:11

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा को बड़ा झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने जले हुए कैश केस में इंपीचमेंट मोशन में उनके खिलाफ आरोपों की जांच कर रहे पार्लियामेंट्री पैनल को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी। वर्मा ने अपने खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए लोकसभा स्पीकर द्वारा बनाई गई पार्लियामेंट्री कमेटी की वैलिडिटी को चुनौती दी थी।

जस्टिस वर्मा ने कमेटी बनाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें हटाने के प्रस्ताव को राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन ने खारिज कर दिया था। जस्टिस दीपांकर दत्ता और एससी शर्मा की बेंच ने 8 जनवरी, 2026 को याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने अब याचिका खारिज कर दी है, जिससे पार्लियामेंट्री कमेटी को आगे बढ़ने की इजाजत मिल गई है।

जज इन्क्वायरी एक्ट के तहत इन्क्वायरी कमेटी

सुप्रीम कोर्ट जस्टिस वर्मा की उस याचिका पर सुनवाई करने वाला था जिसमें जज (इन्क्वायरी) एक्ट के तहत उनकी जांच के लिए "एकतरफा" कमेटी बनाने के लोकसभा स्पीकर के एक्शन को चुनौती दी गई थी। कोर्ट में जस्टिस वर्मा की तरफ से सीनियर वकील मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि 1968 एक्ट के सेक्शन 3(2) के तहत कमेटी बनाना कानून के तहत उनके बराबर बर्ताव और सुरक्षा के अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने दलील दी कि स्पीकर ने एक ही दिन संसद के दोनों सदनों में इंपीचमेंट मोशन का नोटिस दिए जाने के बावजूद एकतरफा कमेटी बनाई। 8 जनवरी को पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

अगस्त में बनी थी कमेटी

आपको बता दें कि अगस्त 2025 में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन में इंपीचमेंट मोशन लाए जाने के बाद जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाले पैनल की घोषणा की थी। इस तीन सदस्यों वाले पैनल में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार, मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस मनिंदर मोहन और सीनियर वकील बी.वी. आचार्य शामिल हैं।

क्या है पूरी घटना

यह पैनल जस्टिस वर्मा के खिलाफ इंपीचमेंट मोशन के बाद बनाया गया था, जिसमें उनके घर से बड़ी मात्रा में आधे जले हुए करेंसी नोट मिले थे। पिछले साल मार्च में दिल्ली में जस्टिस वर्मा के सरकारी घर में आग लगने के बाद कैश के बंडल मिले थे, जिनमें से कुछ 1.5 फीट से भी ऊंचे थे। उस समय के चीफ जस्टिस ने इस घटना पर ध्यान दिया और जस्टिस वर्मा का दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया।