ट्रंप की कब्जे की धमकी के बीच 6 देश के सैनिक पहुंचे ग्रीनलैं, NATO देश सक्रिय

ट्रंप की कब्जे की धमकी के बीच 6 देश के सैनिक पहुंचे ग्रीनलैं, NATO देश सक्रिय
khushbu Rajput JHBNEWS टीम,सूरत 2026-01-15 13:43:42

ग्रीनलैंड : दुनिया के सबसे बड़े द्वीप ग्रीनलैंड पर कब्जे की डोनाल्ड ट्रंप की चाहत ने ग्लोबल स्ट्रैटेजी ने एक नया मोड़ ले लिया है। ट्रंप की धमकी और रूस और चीन के बढ़ते असर के डर के बीच, डेनमार्क की अपील पर छह NATO देशों ने ग्रीनलैंड में अपनी मिलिट्री मौजूदगी बढ़ानी शुरू कर दी है।

किस देश ने भेजी सेना?

रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक 6 बड़े देशों ने डेनमार्क के अंडर आने वाले ऑटोनॉमस इलाके ग्रीनलैंड की सुरक्षा के लिए अपने सैनिकों और मिलिट्री के जवानों को तैनात करने का ऐलान कर दिया है, जिसमें स्वीडिश प्राइम मिनिस्टर उल्फ क्रिस्टरसन ने सैनिक भेजने की पुष्टि की है। नॉर्वे ने दो मिलिट्री टीमें भेजी हैं। जर्मनी ने समुद्री निगरानी और टोही मिशन के लिए सैनिकों की एक टुकड़ी भेज दी है। फ्रांस की बात करे तो फ़्रांस ने सहयोगी देशों की जॉइंट एक्सरसाइज में शामिल होने के लिए एक मिलिट्री टीम भेजी है। नीदरलैंड और कनाडा भी इस मिलिट्री एक्सरसाइज का हिस्सा बन गए हैं।

‘ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस’

यह पूरी मिलिट्री तैनाती डेनमार्क के शुरू किए गए “ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस” के हिस्से के तौर पर की जा रही है। इस मिशन का मुख्य मकसद आर्कटिक इलाके में समुद्री निगरानी बढ़ाना और संभावित सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए एक मिलिट्री ढांचा तैयार करना है।

ट्रंप की धमकी और रूस-चीन का डर

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि चूंकि ग्रीनलैंड की सुरक्षा कमजोर है, इसलिए रूस और चीन इसका फायदा उठा सकते हैं। इसी बहाने उन्होंने ग्रीनलैंड को US में मिलाने की बात कही है। हालांकि, डेनमार्क ने इस प्रस्ताव को साफ तौर पर खारिज कर दिया है और अपने NATO सहयोगियों से मदद मांगी है।

इस एक्सरसाइज के पीछे दो मुख्य संकेत

डिफेंस एक्सपर्ट इस मिलिट्री मूवमेंट को दो तरह से देख रहे हैं। यूरोपियन देश और कनाडा ट्रंप को यह मैसेज दे रहे हैं कि पूरा NATO ग्रीनलैंड की सुरक्षा के लिए ऑर्गनाइज्ड है। अगर ट्रंप ने कब्जा करने की कोशिश की, तो उन्हें न सिर्फ डेनमार्क बल्कि अपने पुराने सहयोगियों का भी विरोध झेलना पड़ेगा।

दूसरी तरफ, ये देश यह भी दिखा रहे हैं कि अगर ट्रंप रूस या चीन से डरते हैं, तो इसका हल ग्रीनलैंड पर कब्जा करना नहीं, बल्कि NATO के जरिए मिलिट्री प्रेजेंस बढ़ाना है।

यह ध्यान देने वाली बात है कि ग्रीनलैंड अब सिर्फ़ बर्फ़ का एक द्वीप नहीं रहा, बल्कि अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच झगड़े का केंद्र बन गया है। आने वाले दिनों में आर्कटिक इलाके में मिलिट्री गतिविधियां तेज़ होने की संभावना है