ACB का खुलासा : 2,000 करोड़ रुपये का मिड-डे मील घोटाला, राजस्थान में स्कूल बंद होने के बावजूद खाना बांटा गया!
राजस्थान मिड डे मील स्कैम: राजस्थान एंटी-करप्शन ब्यूरो ने 2,000 करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफाश किया है। यह स्कैम मिड-डे मील स्कीम के तहत हुआ, जिसमें पता चला है कि कोरोना महामारी के दौरान जब सभी स्कूल बंद थे, तब भी बच्चों को मिड-डे मील दिया जा रहा था।
इस मामले में ACB ने राजस्थान स्टेट कोऑपरेटिव कंज्यूमर फेडरेशन लिमिटेड (CONFED), सेंट्रल वेयरहाउस और कई प्राइवेट कंपनियों से जुड़े 21 नामजद आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की है।
सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में अशोक गहलोत सरकार में पूर्व मंत्री रहे और अभी BJP नेता राजेंद्र यादव के बेटे और उनके रिश्तेदारों का नाम शामिल है। राजेंद्र यादव के बेटे मधुर यादव और त्रिभुवन यादव पर आरोप लगे हैं। FIR में कई और रिश्तेदारों के भी नाम हैं जो प्राइवेट फर्म के अलग-अलग काम संभाल रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
अधिकारियों का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान अशोक गहलोत सरकार ने CONFED के ज़रिए स्कूली बच्चों को दाल, तेल, मसाले और दूसरी खाने की चीज़ों वाले कॉम्बो पैक देने का इंतज़ाम किया था। साथ ही यह भी दावा किया गया कि घर-घर जाकर स्कूली बच्चों को खाना बांटा गया। हालांकि, इस मामले में भ्रष्टाचार की कई शिकायतें मिली हैं।
जब ACB ने जांच शुरू की तो मामला बढ़ गया। अधिकारियों ने बताया कि जांच में पता चला कि अधिकारियों ने क्राइटेरिया में हेरफेर करके टेंडर प्रोसेस में धांधली करने की साज़िश रची थी। ऐसा करके, योग्य कंपनियों को बिडिंग प्रोसेस से बाहर कर दिया गया, जिससे सिर्फ़ चुनी हुई कंपनियों को ही कॉन्ट्रैक्ट मिला। आरोप है कि इन कंपनियों ने आगे शेल कंपनियों को काम बांट दिया और ऐसे सप्लायर और ट्रांसपोर्टर की एक नकली सप्लाई चेन बनाई जो मौजूद ही नहीं थे, जिसमें बहुत कम या कोई असली खरीद या डिलीवरी नहीं हुई।
जब ACB ने जांच शुरू की तो मामला बढ़ गया। ACB के मुताबिक, कई मामलों में बिना किसी खरीद या सप्लाई के नकली और बड़े बिल जारी किए गए। इन नकली बिलों के आधार पर पेमेंट जारी किए गए। इस घोटाले से राज्य की संपत्ति को 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।