अब ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे चलेंगी ट्रेनें और कारें, देश की पहली 'अंडरवाटर टनल' को हरी झंडी
भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। अब असम में ब्रह्मपुत्र नदी की उफनती लहरों के नीचे से ट्रेनें और कारें गुजरेंगी। जी हां, आपने सही पढ़ा! भारत ने अपनी पहली 'अंडरवाटर ट्विन-ट्यूब टनल' (पानी के नीचे दो टनल) बनाने को हरी झंडी दे दी है। यह प्रोजेक्ट न सिर्फ यात्रियों के लिए, बल्कि देश की सुरक्षा के लिए भी गेम-चेंजर साबित होगा।
क्या है यह ट्विन-ट्यूब टनल प्रोजेक्ट?
आसान शब्दों में कहें तो ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे दो बड़ी टनल (ट्यूब) बनाई जाएंगी। इनमें से एक ट्यूब में रेलवे ट्रैक होगा जिस पर ट्रेनें चलेंगी, जबकि दूसरी ट्यूब में कारें और दूसरी गाड़ियां चलेंगी। यह टनल असम के गोहपुर और नुमालीगढ़ शहरों को जोड़ेगी।
एक खास सरकारी पैनल ने इस 15.8 km लंबी टनल को बनाने की मंजूरी दे दी है। खास बात यह है कि यह टनल न सिर्फ समुद्र तल से ऊपर, बल्कि नदी तल से 32 मीटर नीचे भी बनेगी।
देश की सुरक्षा के लिए एक बहुत ज़रूरी कदम
यह प्रोजेक्ट सिर्फ ट्रांसपोर्टेशन के लिए ही नहीं, बल्कि आर्मी के लिए भी बहुत ज़रूरी है। चूंकि भारत चीन बॉर्डर के पास है, इसलिए किसी भी इमरजेंसी या युद्ध जैसी स्थिति में आर्मी का मूवमेंट और तोप के गोले या दूसरे हथियार इस टनल के ज़रिए बहुत तेज़ी से बॉर्डर तक पहुंचाए जा सकते हैं। यह एक स्ट्रेटेजिक प्रोजेक्ट है, इसलिए इसका खर्च भी मिनिस्ट्री ऑफ़ रोड ट्रांसपोर्ट, रेलवे और मिनिस्ट्री ऑफ़ डिफेंस मिलकर उठाएंगे।
खर्च और डिज़ाइन की बातें
इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 18,600 करोड़ रुपये होने की संभावना है।
रोड और रेलवे ट्रैक मिलाकर टनल की कुल लंबाई 33.7 km होगी।
डिज़ाइन के मुताबिक, ट्रेन इलेक्ट्रिक होगी और बैलिस्टिक ट्रैक का इस्तेमाल करेगी।
सुरक्षा कारणों से, ऐसा सिस्टम होगा कि जब ट्रेन गुज़रेगी तो ट्रैफिक को दूसरी ट्यूब में डायवर्ट किया जा सकेगा।
यह प्रोजेक्ट कब पूरा होगा?
अधिकारियों के मुताबिक, काम शुरू होने के 5 साल के अंदर इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का टारगेट है। यह प्रपोज़ल जल्द ही अप्रूवल के लिए यूनियन कैबिनेट के पास जाएगा। उम्मीद है कि असम में असेंबली इलेक्शन से पहले यह काम शुरू हो सकता है। इस टनल के बनने से अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और दूसरे नॉर्थ-ईस्ट राज्यों की कनेक्टिविटी काफी बेहतर हो जाएगी। पहले यहां सिर्फ रोड टनल बनाने का प्लान था, लेकिन अब रेलवे ट्रैक जुड़ने से बजट तो बढ़ गया है, लेकिन सुविधाएं भी दोगुनी हो गई हैं।