गुजरात : 31 दिसंबर पहले पुलिस एक्टिव, 3 दिन में 700 नशेड़ियों को पकड़ा
गुजरात में कागज़ों पर शराब बैन है, लेकिन असलियत यह है कि गली-गली में शराब बिक रही है। वडोदरा ज़िले की पुलिस ने पिछले तीन दिनों में 'ड्रिंक एंड ड्राइव' के 700 से ज़्यादा केस दर्ज करके सराहनीय काम की है, लेकिन ये आंकड़े ही साबित करते हैं कि ज़िले में नशे का धंधा कितना फल-फूल रहा है। अब सवाल यह है कि अगर पुलिस तीन दिन में 700 नशेड़ियों को पकड़ सकती है, तो फिर ये नशेड़ी और शराब के तस्कर किसके रहमोकरम पर पूरे साल बेलगाम घूमते रहते हैं?
31 दिसंबर आते ही पुलिस अचानक एक्टिव हो जाती है। ज़िले के करीब 30 एंट्री-एग्जिट पॉइंट पर चेकिंग के नाम पर दिखावा किया जा रहा है। पुलिस का दावा है कि वे बेगुनाह लोगों की जान बचाने के लिए यह कैंपेन चला रहे हैं, लेकिन अगर पुलिस सच में सीरियस है, तो वे यह क्यों नहीं पकड़ रहे कि शराब कहाँ से आती है और बाकी पुरे साल में इसे कौन बेचता है?
सिर्फ़ तीन दिनों में ड्रिंक एंड ड्राइव के 700 से ज़्यादा मामले सामने आए हैं, पुलिस की मेहनत से ज़्यादा, यह इस बात का सबूत है कि राज्य शराबबंदी कानूनों की धज्जियाँ उड़ा रहा है। अगर शराब मिल ही नहीं रही, तो इतनी बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर नशे में कैसे घूम रहे हैं? पुलिस सिर्फ़ ड्राइवरों को अरेस्ट करके खुश है, लेकिन जिनके ज़रिए यह शराब परोसी जा रही है, उन तक पहुँचने में पुलिस इतनी धीमी क्यों है, यह एक बड़ा सवाल है।