अरावली मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व आदेश पर लगाई रोक, जाने पूरा मामला?

अरावली मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व आदेश पर लगाई रोक, जाने पूरा मामला?
JHB TEAM JHBNEWS टीम,सूरत 2025-12-29 14:00:37

अरावली मामला: सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला मामले में अपने ही 20 नवंबर के फैसले पर अस्थायी रोक लगा दी है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है। जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने मामले की सुनवाई की। देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने विशेषज्ञ समिति की सिफारिश और उस पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई सभी टिप्पणियों को निलंबित कर दिया है। अगले आदेश तक समिति की कोई भी सिफारिश लागू नहीं की जाएगी। पूरे मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी। जानकारी है कि सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा या शब्दावली को मान्यता दी थी, जिसके अनुसार केवल 100 मीटर से अधिक ऊंचे पहाड़ों को ही अरावली पर्वतमाला माना जाना चाहिए। इसके बाद ही पूरा विवाद शुरू हुआ था। सुप्रीम कोर्ट के आज के आदेश ने पर्यावरणविदों और अरावली को बचाने के लिए आंदोलन कर रहे लोगों को बड़ी जीत दिलाई है। 

राज्य और केंद्र सरकारों को सूचना 

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि समिति की रिपोर्ट और उस पर अदालत की टिप्पणियों की गलत व्याख्या की जा रही है। ऐसे में इस रिपोर्ट और अदालत के आदेश को लागू करने से पहले निष्पक्ष और स्वतंत्र मूल्यांकन की आवश्यकता है। इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली समेत सभी संबंधित राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। केंद्र सरकार को भी नोटिस भेजा गया है। 

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कुल 5 सवाल पूछे हैं? 

1. अरावली की सीमाओं पर प्रश्न: क्या अरावली की परिभाषा को केवल 500 मीटर के क्षेत्र तक सीमित करने से ऐसी विरोधाभासी स्थिति उत्पन्न होती है, क्या इससे संरक्षण का दायरा कम हो रहा है?

2. गैर-अरावली क्षेत्रों में वृद्धि: क्या परिभाषा में परिवर्तन से 'गैर-अरावली' माने जाने वाले क्षेत्रों का दायरा बढ़ गया है? क्या ऐसे क्षेत्रों में नियंत्रित खनन की अनुमति दी जा सकती है?

3. दो पर्वत श्रृंखलाओं के बीच के अंतराल पर स्पष्टीकरण: यदि अरावली के दो क्षेत्र 100 मीटर या उससे अधिक चौड़े हैं और उनके बीच 700 मीटर की दूरी है, तो क्या उस खाली क्षेत्र में नियंत्रित खनन की अनुमति दी जानी चाहिए?

4. पर्यावरणीय चुनौती: अरावली की 'पारिस्थितिक निरंतरता' को बिना किसी बाधा के कैसे संरक्षित किया जा सकता है?

5. नियामकीय कमियां और विस्तृत मूल्यांकन: यदि मौजूदा नियमों में कोई बड़ी कानूनी या नियामकीय कमियां पाई जाती हैं, तो क्या अरावली श्रृंखला की मजबूती बनाए रखने के लिए आगे गहन सर्वेक्षण की आवश्यकता है?

पूरा विवाद क्या है?

गौरतलब है कि केंद्रीय पर्यावरण विभाग की एक समिति ने सर्वोच्च न्यायालय को सिफारिश की थी कि केवल 100 मीटर या उससे अधिक ऊँचाई वाले पहाड़ों को ही अरावली पर्वतमाला माना जाना चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय ने 20 नवंबर को इस सिफारिश को स्वीकार कर लिया था। तब से गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। लोगों को डर है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो अरावली पर्वतमाला नष्ट हो जाएगी और माफिया अंधाधुंध खनन करेंगे। लोगों ने केंद्र सरकार के खिलाफ आवाज उठाई है। हालांकि, बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों और बढ़ते विवाद को देखते हुए, केंद्र सरकार ने 24 दिसंबर को एक नया आदेश जारी किया जिसमें कहा गया कि अरावली में किसी भी प्रकार के नए खनन की अनुमति नहीं दी जाएगी।