SC ने रेप केस में सज़ा काट रहे युवक को रिहा करने का आदेश दिया, नौकरी भी बहाल की, जानें मामला
एक अनोखे और ऐतिहासिक फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने रेप केस में 10 साल जेल की सज़ा काट रहे एक युवक को बरी कर दिया है और उसे जेल से रिहा कर दिया है। कोर्ट ने अपनी 'छठी इंद्री' का इस्तेमाल करके देखा कि यह मामला रेप का नहीं बल्कि सिर्फ़ एक गलतफहमी का था। कोर्ट की कोशिशों से युवक ने शिकायत करने वाली लड़की से शादी कर ली है और अब दोनों खुशहाल ज़िंदगी जी रहे हैं। इतना ही नहीं, कोर्ट ने युवक की सरकारी नौकरी भी बहाल करने का आदेश दिया है।
क्या था पूरा मामला?
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने इंसानियत दिखाते हुए चैंबर में पार्टियों से आमने-सामने बातचीत की। कोर्ट ने अपनी 'छठी इंद्री' से समझ लिया कि मामला रेप का नहीं बल्कि गलतफहमी का था और दोनों को फिर से एक साथ लाकर उन्हें इंसाफ़ दिलाया।
आर्टिकल 142 का इस्तेमाल करके 'पूरा न्याय'
सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के आर्टिकल 142 के तहत अपनी खास शक्तियों का इस्तेमाल किया। जुलाई में कोर्ट की निगरानी में दोनों की शादी तय हुई। शादी के पांच महीने बाद, जब कोर्ट को यकीन हो गया कि दोनों पति-पत्नी के तौर पर खुशहाल ज़िंदगी जी रहे हैं, तो उसने अपना आखिरी फैसला सुनाया और FIR और सज़ा दोनों को रद्द कर दिया।
नौकरी भी वापस मिलेगी और सैलरी भी!
कोर्ट ने इंसानियत का रास्ता अपनाने वाले युवक को बड़ी राहत दी है। साथ ही आदेश दिया है कि उसे तुरंत मध्य प्रदेश के सागर के उस अस्पताल में वापस रखा जाए, जहां वह काम कर रहा था और जेल के दौरान का बकाया भी दिया जाए।