Breaking News: कोरोना के बाद सबसे बड़ा स्वास्थ्य संकट, डॉक्टरों की गंभीर चेतावनी

Breaking News: कोरोना के बाद सबसे बड़ा स्वास्थ्य संकट, डॉक्टरों की गंभीर चेतावनी
JHB TEAM JHBNEWS टीम,सूरत 2025-12-27 12:49:06

भारत में कोरोना वायरस ने भारी तबाही मचाई थी। स्कूल बंद कर दिए गए थे, कर्मचारियों को घर से काम करने के निर्देश दिए गए थे। इस दौरान कई लोगों को अपनी नौकरियां भी गंवानी पड़ीं। अब डॉक्टरों ने हाल ही में एक चौंकाने वाली चेतावनी जारी की है, जिसे कोरोना के बाद का सबसे बड़ा स्वास्थ्य संकट माना जा रहा है।

भारत में प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन चुका है। दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। इस मुद्दे पर अदालतों ने भी सरकार को फटकार लगाई है। दिल्ली और मुंबई की हवा अब स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो गई है। ब्रिटेन में कार्यरत भारतीय मूल के फेफड़े और हृदय रोग विशेषज्ञों ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है, जिससे सनसनी फैल गई है।

कोरोनावायरस के बाद वायु प्रदूषण एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। भारत अब वायु प्रदूषण के रूप में कोरोना वायरस से भी बड़े संकट का सामना कर रहा है। प्रदूषण देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, उत्तर भारत में लाखों लोगों के फेफड़े पहले से ही गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जो बेहद चिंताजनक है।

फेफड़ों की बीमारियों की बड़ी लहर निकट

उत्तर भारत में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है और फेफड़ों की बीमारियों की एक बड़ी लहर आने की आशंका है। लिवरपूल के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. मनीष गौतम ने स्पष्ट कहा है कि उत्तर भारत में रहने वाले लाखों लोगों के फेफड़े वर्षों से जहरीली हवा के कारण खराब हो चुके हैं और यह समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। जैसे टीबी को नियंत्रित करने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाए गए थे, वैसे ही अब फेफड़ों की बीमारियों के लिए भी ऐसे कार्यक्रमों की जरूरत है।

दिसंबर महीने में दिल्ली के अस्पतालों में श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या में 20 से 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इनमें बड़ी संख्या में युवा भी शामिल हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, सिरदर्द, हल्की खांसी, गले में दर्द, सूखी आंखें और बार-बार संक्रमण जैसे लक्षणों को अक्सर मामूली समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन यह एक गंभीर खतरे का संकेत हो सकता है।

बर्मिंघम के कार्डियोलॉजिस्ट प्रोफेसर डेरेक कॉनॉली ने बताया कि हृदय रोग बहुत धीरे-धीरे विकसित होता है। प्रदूषण के सूक्ष्म कण PM2.5 दिखाई नहीं देते, लेकिन शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने भी स्वीकार किया है कि दिल्ली के प्रदूषण में परिवहन क्षेत्र का लगभग 40 प्रतिशत योगदान है। यदि प्रदूषण इसी रफ्तार से बढ़ता रहा, तो भारत को कोरोना वायरस से भी बदतर महामारी का सामना करना पड़ सकता है।