ऑपरेशन ‘म्यूल अकाउंट’: सूरत SOG की ऐतिहासिक कार्रवाई, 200 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़

ऑपरेशन ‘म्यूल अकाउंट’: सूरत SOG की ऐतिहासिक कार्रवाई, 200 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़
Shubham Pandey JHBNEWS टीम,सूरत 2025-12-25 19:41:35

सूरत एसओजी ने अंतरराष्ट्रीय चीनी गैंग के संपर्क में रहकर साइबर फ्रॉड करने वाली गैंग को सूरत के डिंडोली इलाके से गिरफ्तार किया है। श्री कृष्णा पैकर्स एंड मूवर्स की ऑफिस की आड़ में चल रहे अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश करते हुए मुख्य आरोपी समेत पांच आरोपियों को पकड़ा गया है। आरोपियों के पास से अलग-अलग बैंकों की चेकबुक, पासबुक, एटीएम कार्ड, डेबिट कार्ड, कंप्यूटर, पैन कार्ड, आधार कार्ड, बैंक अकाउंट ओपनिंग फॉर्म, पार्टनरशिप डीड, किराया अनुबंध के दस्तावेज समेत कुल 10.19 लाख रुपये का मुद्देमाल जब्त किया गया है।

आरोपियों से मिले 14 म्यूल बैंक अकाउंट की जांच में देश के विभिन्न राज्यों में कुल 71 साइबर फ्रॉड की शिकायतें दर्ज पाई गई हैं। इन खातों के जरिए अनुमानित 200 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई है।

गुजरात पुलिस द्वारा पूरे राज्य में फिलहाल “ऑपरेशन म्यूल अकाउंट” चलाया जा रहा है। इस ऑपरेशन में सूरत एसओजी की टीम भी सक्रिय है। इसी के तहत सूरत एसओजी को अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड रैकेट को पकड़ने में अब तक की सबसे बड़ी सफलता मिली है। एसओजी ने 200 करोड़ रुपये से अधिक के साइबर फ्रॉड मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुख्य आरोपी प्रतीक वसावा है।

सूरत एसओजी के अनुसार, साइबर फ्रॉड करने वाली गैंग द्वारा नया ट्रेंड अपनाया जा रहा है। इसमें फर्जी कंपनियां खड़ी कर उनके नाम पर बैंक अकाउंट खुलवाए जाते हैं और लोगों को पैसों का लालच दिया जाता है। इसके बाद करंट और सेविंग अकाउंट खुलवाकर साइबर फ्रॉड से प्राप्त रकम ट्रांसफर कर यूएसडीटी में कन्वर्ट की जाती है और देश-विदेश में भेजी जाती है। ऐसी गैंग पिछले पांच वर्षों से सूरत के डिंडोली इलाके में सक्रिय थी।

राजदीपसिंह नकुम (डीसीपी, सूरत एसओजी): सूचना के आधार पर सूरत एसओजी की टीम ने डिंडोली के मंगल पार्क सोसायटी के पास स्थित ग्रीनवैली शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की एक ऑफिस में छापा मारा। श्री कृष्णा पैकर्स एंड मूवर्स नाम की इस ऑफिस से प्रतीक प्रफुल गोरधनभाई वसावा, दीपक उमादत्त वेदनाथ पांडे, रूपेश दिगंबर देविदास हांडगे और भूषण प्रवीण प्रताप पाटील को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में लिंबायत क्षेत्र के सलीम उर्फ समीर आरटीओ अब्बास अलीमिया सैयद का नाम सामने आया, जिसे बाद में लिंबायत से पकड़ा गया।

सूरत एसओजी ने मौके से सात मोबाइल, दो कंप्यूटर, नौ अलग-अलग बैंकों की चेकबुक, चार पासबुक, सात एटीएम व डेबिट कार्ड, पांच सिम कार्ड, अलग-अलग फर्मों की मुहरें, आठ सिक्के, पैन कार्ड, आधार कार्ड, बैंक अकाउंट ओपनिंग फॉर्म, पार्टनरशिप डीड, किराया अनुबंध, 7,500 रुपये नकद और एक होंडा सिटी कार जब्त की। कुल 10.19 लाख रुपये का मुद्देमाल जब्त कर आरोपियों से सख्ती से पूछताछ की गई।

पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों के 14 म्यूल बैंक अकाउंट में 200 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन हुआ है। इन खातों पर देश के अलग-अलग राज्यों में 71 साइबर फ्रॉड की शिकायतें दर्ज हैं—गुजरात में 8, बिहार 2, दिल्ली 3, हरियाणा 3, कर्नाटक 8, महाराष्ट्र 12, ओडिशा 2, पंजाब 3, राजस्थान 4, तमिलनाडु 4, उत्तर प्रदेश 6, पश्चिम बंगाल 4, तेलंगाना 5, आंध्र प्रदेश व गोवा में 1-1, छत्तीसगढ़ 2 और झारखंड में 1 शिकायत शामिल है।

सभी आरोपियों को सूरत कोर्ट में पेश कर पांच दिन का रिमांड लिया गया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी अपने साथियों के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड रैकेट चला रहे थे। वे 20-25 हजार रुपये में बैंक अकाउंट और सिम कार्ड हासिल करते, ऑनलाइन लॉगिन बनाकर लोगों को ठगते और फ्रॉड की रकम अपने खातों में मंगवाते थे।

आरोपी टेलीग्राम के जरिए चीनी गैंग के संपर्क में थे। ठगी से प्राप्त रकम को यूएसडीटी में कन्वर्ट किया जाता था। यह काम लिंबायत का सलीम उर्फ समीर आरटीओ करता था। मुख्य आरोपी प्रतीक वसावा और सलीम यूएसडीटी में बदली रकम दुबई में बैठे चीनी गैंग को भेजते थे, जिसमें प्रतीक को करीब 20 प्रतिशत कमीशन मिलता था।

राजदीपसिंह नकुम ने बताया कि मुख्य आरोपी प्रतीक वसावा के खिलाफ डिंडोली और गांधीधाम थानों में कुल छह मामले दर्ज हैं, जिनमें एक अपने दोस्त की पत्नी से छेड़छाड़ का मामला भी शामिल है। दीपक पांडे के खिलाफ डिंडोली, पांडेसरा, लिंबायत और वलसाड के पारडी थाने में सात मामले दर्ज हैं। रूपेश हांडगे के खिलाफ सचिन थाने में और भूषण पाटील के खिलाफ डिंडोली व गांधीनगर सीआईडी क्राइम में तीन मामले दर्ज हैं। आरोपी सलीम आरटीओ पहले आरटीओ एजेंट था और वर्तमान में वाहन खरीद-फरोख्त का काम करता है।

डीसीपी राजदीपसिंह नकुम ने बताया कि आरोपियों से मिले अहम सबूतों के आधार पर जांच तेज की गई है। मोबाइल और लैपटॉप की गहन जांच की जा रही है। 200 करोड़ रुपये से अधिक के साइबर फ्रॉड रैकेट की गहराई से जांच के लिए ईडी, जीएसटी, आईटी समेत अन्य एजेंसियों की मदद ली जाएगी।

अंतरराष्ट्रीय चीनी गैंग के संपर्क में रहकर साइबर फ्रॉड रैकेट चलाने वाले पांचों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद सूरत एसओजी ने आगे की जांच तेज कर दी है। जांच में फ्रॉड की रकम और बढ़ने की संभावना है। साथ ही दुबई में बैठे “बिग ब्रदर” नामक मुख्य सरगना का भी खुलासा हुआ है, जो दुबई से एपीके फाइल भेजकर फ्रॉड को अंजाम देता था। इस रैकेट में बिग ब्रदर समेत गणेश उर्फ प्रेम बिराड़े, राज श्रीवास्तव, चंदन उपाध्याय, शैलेश पांडे, शरद रविंद्र पवार, प्रदीप विश्वकर्मा और मीनाज पटेल को वांछित घोषित किया गया है। इनकी गिरफ्तारी के बाद और बड़े खुलासे होने की संभावना है।