डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीज़ा की फीस बढ़ा के $100,000 की। IT इंडस्ट्री में बढ़ी चिंता

डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीज़ा की फीस बढ़ा के $100,000 की। IT इंडस्ट्री में बढ़ी चिंता
khushbu Rajput JHBNEWS टीम,सूरत 2025-12-22 15:48:34

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वर्क वीज़ा के लिए अंदाजित 90 लाख की नई फ़ीस की घोषणा की है, जिससे भारत की IT और IT इनेबल्ड सर्विसेज़ इंडस्ट्री में चिंता का माहौल है । यह निर्णय से टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़, इंफ़ोसिस, विप्रो और कॉग्निजेंट जैसी कंपनियों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। जो H-1B वीज़ा पर बड़ी संख्या में स्किल्ड भारतीय कर्मचारियों को US भेजती हैं। 

जाने क्या है H-1B वीज़ा ?

आपको बता दे कि सामान्य तौर पर H-1B वीज़ा एक नॉन-परमानेंट एम्प्लॉयमेंट वीज़ा है। जो अमेरिकी कंपनियों को किसी खास फ़ील्ड में बैचलर डिग्री या उससे ज़्यादा डिग्री वाले विदेशी कर्मचारियों को काम पर रखने की अनुमति देता है। US हर साल सिर्फ़ 85,000 H-1B वीज़ा जारी करता है, जिसके लिए लाखों एप्लीकेशन आते हैं और इन्हें लॉटरी सिस्टम से चुना भी जाता है।

क्या फीस बढ़ाने का मकसद 'सिस्टम स्पैम' को रोकना है?

कई IT स्टाफिंग कंपनियाँ लॉटरी जीतने के अपने चांस बढ़ाने के लिए एक ही कैंडिडेट के लिए कई एप्लीकेशन जमा करके सिस्टम का गलत इस्तेमाल करती हैं। इस तरह, "सिस्टम स्पैम" से कम क्वालिफिकेशन वाले लोगों को US में नौकरी मिलने के चांस बढ़ जाते हैं। ये लोग अमेरिकी वर्कर्स से कम सैलरी पर नौकरी करने को तैयार हो जाते हैं, जिससे इंडियंस को वो नौकरियां मिल जाती हैं जो अमेरिकियों को मिलती हैं । जिसे रोकने के लिए यह निर्णय अमेरिकन सरकार ने लिया है ।

फीस में $100,000 की बढ़ोतरी करके US यह पक्का करना चाहता है कि सिर्फ़ क्वालिफाइड इंडियंस ही US में आ सकें। जिसे अमेरिकन लोकल लोगों को भी नौकरी मिलेगी ।