कौन है पायल नाग? जो हाथों से नहीं पैरों से साधती हैं निशाना

कौन है पायल नाग? जो हाथों से नहीं पैरों से साधती हैं निशाना
khushbu Rajput JHBNEWS टीम,सूरत 2025-12-20 15:10:48

अक्सर हम अपनी लेख में आपके लिए मोटिवेशनल कहानीयां लेकर आते रहते है जो हमको मोटिवेट करते है आज भी हमेशा की तरह इस लेख में हम एक ऐसे शख्स के बारे में बात करेंगे जिसके हाथ और पैर नहीं है इसके बावजूद भी स्वर्णपदक जीत सकता है तो चली जानते हैं कौन है वह सख्स?

आज हम इस लेख में पायल नाग के बारे में बात करेंगे जिन्होंने जयपुर में हुई छठी पैरा आर्चरी नेशनल चैंपियनशिप में उन्होंने दो स्वर्ण पदक जीते, यहां तक कि पैरालंपिक पदक विजेता शीतल देवी को भी हराया।

ये कहानी शुरू होती है ओडिशा से ओडिशा में मात्र 5 साल की उम्र वे एक दर्दनाक बिजली हादसे में पायल नाग के हाथ पैर छीन लिए। हाथ पैर नहीं होने के बाद पायल की जिंदगी और कठिन हो गई। अचानक जिंदगी उनकी बदल गई जिस पर विश्वास करना मुश्किल हो गया। अब पायल की देखरेख करना परिवार वालों के लिए भीमुश्किल हो गया, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन की मदद से पायल को बलांगीर के पार्वतीगिरी बाल निकेतन अनाथालय भेज दिया गया।



पायल नाग के भले ही जिंदगी ने हाथ पैर छीन लिए पाए लेकिन जज्बात नहीं छिन पाई घर से दूर रहते हुए पायल ने मुंह से ही चित्र बनाना सीख लिया। चेहरों को बेहद बारीकी से करने वाली उनकी कला का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा, जब वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो वह वीडियो कोच कुलदीप वेदवान तक पहुंच गया। कोच कुलदीप ने पायल को जम्मू के माता वैष्णो देवी श्राइन आर्चरी अकादमी ले आए।

महज 17 साल की उम्र में पायल भारत की सबसे प्रेरक पैरा-आर्चर्स में शामिल हो गईं। जयपुर में हुई छठी पैरा आर्चरी नेशनल चैंपियनशिप में उन्होंने दो स्वर्ण पदक जीते, यहां तक कि पैरालंपिक पदक विजेता शीतल देवी को भी उन्होंने हराया है। आपको बता दें कि पायल नाग न तो अपने हाथों से तीर चलाती है और न ही पैरों से थामती है वो तो अपने पैरो से निशाना साधती हैं। कोच कुलदीप के मार्गदर्शन में उन्होंने धैर्य, अनुशासन और अदम्य साहस के साथ हर तकनीक सीखी।

कोच कुलदीप ने पायल को अदम्य साहस से भर दिया जिसके बाद पायल इस मुकाम तक पहुंच सकी, आज पायल नाग सिर्फ एक तीरंदाज़ नहीं, बल्कि हौसले की पहचान हैं। उनका सपना अब विश्व मंच तक पहुंचने का है। हर छोड़ा गया तीर यही बताता है। रुकावटें वहीं तक होती हैं, जहां विश्वास थम जाता है। इसलिए हौसला रखिए और अपने लक्ष्य पर चलते रहिए।