पंडित रामप्रसाद बिस्मिल को कहां दी गई थी फांसी, जाने क्या थी उनकी आखिरी इच्छा?

पंडित रामप्रसाद बिस्मिल को कहां दी गई थी फांसी, जाने क्या थी उनकी आखिरी इच्छा?
Khushbu rajput JHBNEWS टीम,सूरत 2025-12-19 17:33:45

आज 19 दिसंबर है, आज का दिन आम लोगों के लिए सामान्य दिन है लेकिन अगर आप इतिहास उठाकर देखेंगे तो ये तारीख आम तारीख नहीं लगेगी क्योंकि इस दिन एक महान क्रांतिकारी ने आखिरी सांस ली थी और छोड़ गए अपने पीछे युवाओं के लिए वीरता का संदेश। और एक खूबसूरत शेर जो आज भी लोग बड़े गर्व से गाते है वो शेर है सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है। इतना ही नहीं उन्होंने कई ऐसे शेर लिखे जो आजादी के दीवानों को तबतक मार्गदर्शन करता रहा जबतक आजादी मिल नहीं गई।

कोठरी नंबर सात में रहे थे बिस्मिल

हम बात कर रहे है देश के लिए अपने जान को न्यौछावर करने वाले पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की। राम प्रसाद बिस्मिल एक महान क्रांतिकारी थे जिनको 19 दिसंबर 1927 को गोरखपुर जेल की कोठरी में फांसी के फंदे से लटकाया गया था। बिस्मिल से उनकी आखिरी इच्छा पूछी कि तो उन्होंने कहा कि ''I WISH THE DOWNFALL OF BRITISH EMPIRE।" वो फांसीघर आज भी मौजूद है। जहां उन्हें फांसी दिया गया, लकड़ी का फ्रेम और लीवर भी सुरक्षित है। इस कोठरी को अब बिस्मिल कक्ष और शहीद पंडित राम प्रसाद बिस्मिल बैरक के नाम से संरक्षित किया गया है।

आपको बता दे कि पंडित रामप्रसाद बिस्मिल एक शायर भी थे जो अंग्रेजों के खिलाफ अपनी शेर से ही जंग छेड़ रखी थी और लोगों में कांतिकारी को लेकर जोश भरते रहे। उन्होंने यह जंग फांसी की सजा होने के बाद भी पुरजोश से जारी रखी थी। कई शेर तो उन्होंने कोठरी के दीवारों पर अपने नाखूनों से उकेरा हुआ था। बिस्मिल के वह शब्द आज भी एक बारगी देशभक्ति का जज्बा जगा देते हैं। बिस्मिल ने जेल के कोठरी में होने के बावजूद भी ऐसे कई शेर रच दिए, जो क्रांतिकारी योजनाओं का आधार बन गए।

पंडित रामप्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर जेल के कोठरी नंबर 7 में रखा गया था। उन्होंने 7 नंबर की कोठरी में 123 दिन गुजारे थे। बिस्मिल ने इस कोठरी को अपने साधना कक्ष के तौर पर इस्तेमाल किया। जेल में तो उनको लिखने पढ़ने की कोई सामग्री नहीं मिली तो उन्होंने शेर को अपने ही नाखूनों से दीवारों पर लिख डाली। हालांकि उनको फांसी देने वाले अंग्रेजों ने उनकी मूल लिखावट तो मिटा दी लेकिन उन शेरों को लोगों के दिल से कभी नहीं मिटा सके।

राम प्रसाद बिस्मिल और अन्यों को ब्रिटिश सरकार के खिलाफ राजद्रोह के आरोप में फांसी की सजा सुनाई गई थी। पंडित राम प्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर जेल, असफाकउल्लाह खान को फैजाबाद, रोशन सिंह को नैनी सेंट्रल जेल और राजेंद्र नाथ लाहिड़ी को गोंडा जेल में एक दिन और एक ही समय पर फांसी के फंदे पर लटकाने का फैसला किया गया था। लेकिन बाद में कुछ कारणों से इस फैसले में बदलाव किया गया और असफाकउल्लाह के साथ ही राजेंद्र प्रसाद लाहिड़ी को दो दिन पहले यानी 17 दिसंबर को ही फांसी दे दी गई।