पौष अमावस्या कब है? नोट कर लें डेट, स्नान-दान का समय और सभी शुभ मुहूर्त

पौष अमावस्या कब है? नोट कर लें डेट, स्नान-दान का समय और सभी शुभ मुहूर्त
JHB TEAM JHBNEWS टीम,सूरत 2025-12-13 10:57:40

सनातन धर्म में अमावस्या को अत्यंत पवित्र माना जाता है और पौष माह में पड़ने वाली अमावस्या को पौष अमास कहते हैं। यह तिथि स्नान करने, दान देने और पूर्वजों को याद करने के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किए गए दान और भेंट पूर्वजों को प्रसन्न करते हैं और जीवन की बाधाओं को दूर करते हैं। घर और परिवार में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति बनी रहती है।

पोष अमावस्या 2025 तिथि

  • पंचांग के अनुसार, इस वर्ष पौष अमावस्या शुक्रवार, 19 दिसंबर, 2025 को है।
  • अमावस्या तिथि का प्रारंभ: 19 दिसंबर, सुबह 4:59 बजे
  • अमावस्या तिथि समाप्त: 20 दिसंबर सुबह 7 बजकर 12 मिनट पर
  • उदयतिथि के नियमों के अनुसार, सभी शुभ कार्य 19 दिसंबर को किए जाएंगे।

स्नान करने और दान देने का शुभ समय।

  • पौष अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त को सबसे शुभ समय माना जाता है।
  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:19 बजे से सुबह 6:14 बजे तक
  • इस दौरान स्नान करना, मंत्रोच्चार करना, ध्यान करना और तर्पण करना बहुत फलदायी होता है।

यदि आप ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने में असमर्थ हैं, तो आप सूर्योदय के बाद स्नान कर सकते हैं और दान कर सकते हैं। स्नान के बाद अपनी क्षमता के अनुसार भोजन, वस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुएँ दान करना शुभ माना जाता है।

अन्य शुभ समय

    • लाभदायक समय: 8.26 से 9.43
    • अमृत ​​मुहूर्त: 9.43 से 11.01
    • अभिजीत मुहूर्त: 11:58 से 12:39 तक
    • राहुकाल (शुभ कार्य निषिद्ध): 11.01 से 12.18

    इस शुभ अमावस्या पर एक विशेष योग का निर्माण हो रहा है

    सुबह 3:47 से 10:51 तक शूल योग, उसके बाद गंड योग रहेगा। सुबह से रात 10:51 तक ज्येष्ठ नक्षत्र, उसके बाद मूल नक्षत्र रहेगा। ये दोनों नक्षत्र आध्यात्मिक कार्यों, तर्पण और पूजा के लिए शुभ माने जाते हैं। इसलिए, इस दिन किए गए धार्मिक अनुष्ठानों का लाभ कई गुना बढ़ जाता है।

    पूर्वजों को प्रसन्न करने का सबसे अच्छा समय

    • ऐसा माना जाता है कि अमावस्या के दिन पूर्वज पृथ्वी पर अवतरित होते हैं और अपने वंशजों के कर्मों का फल भोगते हैं। इसलिए, स्नान करने के बाद सुबह तर्पण करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
    • श्राद्ध, पिंडदान और पितृ कर्म करने का सर्वोत्तम समय सुबह 11:30 बजे से दोपहर 2:30 बजे के बीच माना जाता है।
    • ऐसा माना जाता है कि इस दिन की गई भेंटें पूर्वजों को प्रसन्न करती हैं, पूर्वजों के पापों को कम करती हैं और जीवन की बाधाओं को दूर करती हैं। घर में शांति, सौभाग्य और समृद्धि का माहौल रहता है।