सूरत में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब: AQI 337 पार, प्रदूषण से स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा

सूरत में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब: AQI 337 पार, प्रदूषण से स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा
Anjali Singh JHBNEWS टीम,सूरत 2025-11-29 15:46:21

सूरत शहर की हवा की गुणवत्ता (Air Quality) पिछले कई दिनों से चिंताजनक स्तर पर पहुँच गई है। शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगभग 337 दर्ज किया गया है, जो ‘अत्यंत खराब’ श्रेणी में आता है। इस स्तर की हवा में लंबे समय तक रहने से सांस की गंभीर बीमारियाँ और अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं। पिछले पांच दिनों से शहर की हवा लगातार अशुद्ध और प्रदूषित बनी हुई है, जो रोजमर्रा के जीवन में शहरवासियों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर रही है।

प्रदूषण का चिंताजनक स्तर

सूरत शहर का AQI लगभग 337 पर दर्ज किया गया है। AQI का यह स्तर ‘अत्यंत खराब’ श्रेणी में आता है, जो लंबे समय तक संपर्क में रहने पर श्वसन संबंधी गंभीर बीमारियाँ पैदा कर सकता है। पिछले पांच दिनों से शहर की हवा लगातार अशुद्ध और बिगड़ी हुई स्थिति में है, जो रोजमर्रा के जीवन में शहरवासियों के लिए खतरा उत्पन्न कर रही है।

असर वाले इलाके और स्वास्थ्य समस्याएँ

शहर के कुछ औद्योगिक और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर विशेष रूप से अधिक देखा गया है। सबसे अधिक ख़राब हवा वाला इलाका जिसमे सर्वप्रथम कड़ोदरा, लिंबायत, उधना, पांडेसरा और साचिन क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता सबसे खराब दर्ज की गई है। इन इलाकों में औद्योगिक गतिविधियाँ और ट्रैफिक का भार अधिक है। प्रदूषण के इस उच्च स्तर के कारण स्थानीय लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

हवा (Air Pollution) से होने वाली बीमारियाँ मुख्य रूप से श्वसन तंत्र और हृदय पर असर डालती हैं। प्रदूषित हवा में लंबे समय तक रहने से दमा (Asthma) के दौरे बढ़ सकते हैं और क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस (Chronic Bronchitis) जैसी फेफड़ों की बीमारियाँ हो सकती हैं। इसके अलावा साइनस संक्रमण (Sinusitis) और एलर्जी राइनाइटिस (Allergic Rhinitis) जैसी समस्याएँ भी आम हैं, जिससे छींक, नाक बहना और आंखों में जलन होती है। हवा में मौजूद छोटे कण (PM2.5 और PM10) रक्त में जाकर हृदय पर दबाव डाल सकते हैं, जिससे हृदयाघात (Heart Attack) और उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) का खतरा बढ़ जाता है।

प्रदूषण से आंखों में जलन, लालिमा और सूखी आंखें (Dry Eyes) हो सकती हैं, साथ ही त्वचा पर जलन या रैशेस भी दिखाई दे सकते हैं। लंबे समय तक प्रदूषण में रहने से फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer) या फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी का खतरा भी होता है। विशेष रूप से बच्चों में श्वसन तंत्र का विकास धीमा हो सकता है और बुजुर्ग या पहले से बीमार लोगों में स्वास्थ्य जोखिम अधिक होता है। इस कारण प्रदूषण वाले दिनों में मास्क पहनना, बाहर अनावश्यक समय न बिताना और प्रदूषित क्षेत्रों से दूरी बनाकर रहना बेहद जरूरी है।

सूरत में हवा लगातार अशुद्ध रहने के कारण प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें और श्वसन संबंधी बीमारियों से ग्रस्त लोग विशेष सावधानी बरतें। साथ ही, लोगों को मास्क पहनने और प्रदूषित क्षेत्रों से दूरी बनाने की सलाह दी गई है।