Surat: नर्मद विश्वविद्याल परीक्षा में छात्रा AI टूल से नकल करते रंगेहाथ पकड़ाई

Surat: नर्मद विश्वविद्याल परीक्षा में छात्रा AI टूल से नकल करते रंगेहाथ पकड़ाई
Anjali Singh JHBNEWS टीम,सूरत 2025-11-28 16:21:49

वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय (VNSGU) में परीक्षाओं के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आते ही शिक्षा जगत में खलबली मच गई है। विश्वविद्यालय में कंप्यूटर साइंस की परीक्षा के दौरान एक छात्रा अत्याधुनिक AI टूल्स का उपयोग कर ग़ैर-रवैये से उत्तर लिखते हुए पकड़ी गई।

AI प्लेटफॉर्म से ‘लाइव’ कोडिंग उत्तर लेना

मिली जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग को पहले से ही संदेह था कि कंप्यूटर साइंस और IT संकाय के कुछ विद्यार्थी हाई-टेक गैजेट्स और AI टूल्स की मदद से नकल कर रहे हैं। जांच के दौरान परीक्षा स्टाफ ने एक छात्रा को AI प्लेटफॉर्म से ‘लाइव’ कोडिंग के उत्तर लेकर अपनी उत्तरपुस्तिका में लिखते हुए रंगेहाथ पकड़ लिया। परीक्षा कक्ष में इस तरह की आधुनिक नकल पकड़ते ही स्टाफ भी अचंभित रह गया।

घटना ने उठाए गंभीर सवाल

इस तरह के AI टूल्स का उपयोग परीक्षा प्रणाली और मूल्यांकन की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। यदि तकनीकी सवालों के जवाब भी AI से लिखे जाएंगे, तो विद्यार्थियों के वास्तविक ज्ञान का आकलन कैसे होगा? विश्वविद्यालयों को अब AI आधारित नकल पर रोक लगाने के लिए नई रणनीतियाँ और कड़ी निगरानी लागू करनी पड़ेगी।

विश्वविद्यालय की कड़ी कार्रवाई

घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रा के खिलाफ ‘गैर-रवैया अधिनियम’ के तहत केस दर्ज कर कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। नकल करते पकड़े गए छात्रों पर भारी आर्थिक दंड, परीक्षा प्रतिबंध और अन्य दंडात्मक कदम उठाने की प्रक्रिया जारी है। साथ ही, भविष्य में इस प्रकार की गतिविधियों को रोकने के लिए विश्वविद्यालय ने नई गाइडलाइन भी जारी की है। इसमें AI जैसी भाषा वाले उत्तरों पर विशेष निगरानी, परीक्षा कक्ष में फ्लाइंग स्क्वॉड की संख्या बढ़ाना और स्मार्ट डिवाइस पर सख्त प्रतिबंध जैसे निर्देश शामिल हैं।

शिक्षा जगत का कहना है कि यह घटना आने वाले समय में अन्य विश्वविद्यालयों के लिए भी एक बड़ी चेतावनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक परीक्षा प्रणाली में बदलाव करते हुए अधिक विश्लेषणात्मक और समझ पर आधारित प्रश्नों को शामिल करना समय की मांग बन चुका है, ताकि विद्यार्थी अपनी वास्तविक क्षमता के आधार पर मूल्यांकन पा सकें।