Coach Chandu V: जब बदला सपना… और बदल गया पूरे भारतीय ब्लाइंड महिला क्रिकेट का भविष्य
उन्होंने कभी टीम इंडिया की जर्सी पहनने का सपना देखा था, लेकिन किस्मत ने उन्हें एक और बड़ा सपना दिखाया—उस क्रिकेट दुनिया को रोशनी देना, जिसे लोग बहुत कम समझते थे। कर्नाटक के लिए दस से अधिक वर्षों तक शानदार क्रिकेट खेलने वाली और WPL तक पहुँच चुकी चंदू वी (Chandu V) एक समय भारत की आधिकारिक जर्सी पहनने के बेहद करीब थीं। लेकिन उन्होंने अपनी महत्वाकांक्षा को एक तरफ रखकर वह रास्ता चुना, जहाँ प्रतिभा थी, संघर्ष था, लेकिन पहचान नहीं थी—भारतीय ब्लाइंड महिला क्रिकेट।
ब्लाइंड क्रिकेट एक अनोखा खेल है। गेंद के अंदर मौजूद छोटे बियरिंग्स की आवाज़ से खिलाड़ी गेंद की दिशा का अंदाज़ा लगाते हैं। यह तकनीक सीखना किसी भी सामान्य क्रिकेटर के लिए सरल नहीं होता, लेकिन चंदू वी ने न केवल इसे सीखा बल्कि खिलाड़ियों को भी इस कौशल में निपुण बनाया। उन्होंने टीम की फिटनेस, खेल की रणनीति, तकनीक और मानसिक मजबूती को एक नए स्तर पर पहुंचाया। विश्व कप के दौरान उनका पूरा फोकस अनुशासन, एकाग्रता और जीत की मानसिकता पर था, और इस फोकस ने ही इतिहास रच दिया।
चंदू वी भावुक होकर कहती हैं, “मैं इंडिया के लिए नहीं खेल पाई, लेकिन मैंने 11 लड़कियों को भारत के लिए खेलने लायक बनाया। उन्होंने देश को वर्ल्ड कप दिलाया… इससे बड़ा सम्मान मेरे लिए और क्या हो सकता है?”
यह वाक्य सिर्फ भावनाएँ नहीं, बल्कि एक सच्चे कोच की आत्मा है, जब अपने से बड़ा सपना किसी और का पूरा होता देखना ही आपका गर्व बन जाए।
भारत की ब्लाइंड महिला टीम की जीत सिर्फ एक ट्रॉफी की जीत नहीं है। यह उन लड़कियों की जीत है, जो कभी अपने घरों में अनदेखी थीं, लेकिन आज दुनिया के मंच पर भारत को गौरवान्वित कर रही हैं। इस बदलाव के केंद्र में हैं कोच चंदू वी, जिनकी मेहनत, समर्पण और दूरदर्शिता ने भारतीय ब्लाइंड महिला क्रिकेट को एक नए और उज्ज्वल युग में पहुंचा दिया है।
यह कहानी सिर्फ क्रिकेट की नहीं है। यह साहस, त्याग, नेतृत्व और परिवर्तन की कहानी है, एक ऐसी कहानी जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी कि सपने सिर्फ अपने नहीं, दूसरों के लिए भी पूरे किए जा सकते हैं।