गुजरात में घरेलू हिंसा के मामले में चिंताजनक बढ़ोतरी, हर दिन 206 महिलाएं हो रही हैं शिकार

गुजरात में घरेलू हिंसा के मामले में चिंताजनक बढ़ोतरी, हर दिन 206 महिलाएं हो रही हैं शिकार
Khushbu rajput JHBNEWS टीम,सूरत 2025-11-25 15:41:51

गुजरात में महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा के मामले चिंताजनक दर से बढ़ रहे हैं। अकेले इस साल 67,000 से ज़्यादा महिलाएं घरेलू हिंसा का शिकार हुई हैं। इस तरह, हर दिन औसतन 206 महिलाएं घरेलू हिंसा का शिकार हो रही हैं और इसमें चिंताजनक वृद्धि हो रही है।

वर्ष 2025 में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के सबसे ज़्यादा मामले किस ज़िले में होंगे?

ज़िले के मामले

अहमदाबाद = 33869

सूरत = 12414

राजकोट = 11781

वडोदरा = 11308

भावनगर = 6180

अभयम में आने वाली 40 प्रतिशत कॉल घरेलू हिंसा के मामले हैं, हर साल 25 नवंबर को 'महिलाओं के खिलाफ हिंसा रोकथाम दिवस' के रूप में मनाया जाता है। महिला हेल्पलाइन 'अभयम' द्वारा जारी विवरण के अनुसार, इस वर्ष अब तक गुजरात में 1.68 लाख से अधिक कॉल प्राप्त हुई हैं। अभयम में प्राप्त लगभग 40 प्रतिशत कॉल घरेलू हिंसा से संबंधित हैं। पिछले वर्ष अभयम में 2.17 लाख कॉल प्राप्त हुई थीं। इस दर से, प्रतिदिन प्राप्त कॉलों की संख्या 595 थी। इसकी तुलना में, इस वर्ष अब तक 1.68 लाख कॉल प्राप्त हुई हैं।

पिछले पाँच वर्षों में गुजरात में महिलाओं के विरुद्ध हिंसा के मामले

वर्ष मामले

2021 = 1,65,664

2022 = 1,85,746

2023 = 2,18,281

2024 = 2,17,228

2025 = 1,68,041

कुल 8,55,260

कानून क्या कहता है?

विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 में अस्तित्व में आया था। इस कानून के लागू होने से पहले भी, अगर कोई हिंसा हुई हो, यानी पहले कभी घरेलू हिंसा हुई हो, तो वह भी इस कानून के दायरे में आती है। पहले जो कानून था, उसमें पत्नियाँ, माँ और बेटियाँ शामिल थीं। लेकिन, अब जो घरेलू कानून है, उसमें हर महिला शामिल है। यानी महिला की परिभाषा पहले माँ या पत्नी तक ही सीमित थी। अब इसमें सभी महिलाओं को शामिल कर लिया गया है। यानी यह कानून उन पर भी लागू होता है जिनके प्रेम संबंध रहे हों और जिनके साथ वे रह चुकी हों।

अहमदाबाद में पिछले पाँच सालों में महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा के मामले

वर्ष मामला

2021 = 26,999

2022 = 31,612

2023 = 40,027

2024 = 44,791

2025 = 33,869

कुल 1,77,298

इसके अलावा, अगर पति हाथ उठाता है, तो पत्नी को ज़रूरत पड़ने पर क़ानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। दरअसल, महिलाएं समाज, रिश्तेदारों और परिवार के बारे में सोचकर ही इसे बर्दाश्त कर लेती हैं। उन्हें लगता है कि अगर मैंने शिकायत की, तो मेरे घर की इज़्ज़त खराब हो जाएगी। कोई क्या सोचेगा? लेकिन, हर महिला को अपनी ज़िंदगी जीने का हक़ है। उसके ख़िलाफ़ हुए अत्याचारों के ख़िलाफ़ शत-प्रतिशत कार्रवाई होनी चाहिए।