जस्टिस सूर्यकांत बने देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश, जाने वकील से CJI तक की यात्रा
जस्टिस सूर्यकांत ने भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India – CJI) के रूप में शपथ ग्रहण कर ली है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। सुप्रीम कोर्ट में दो दशक से भी अधिक के समृद्ध अनुभव वाले जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल 9 फरवरी 2027 तक रहेगा।
जस्टिस सूर्यकांत का न्यायिक करियर अत्यंत उल्लेखनीय रहा है। सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व के फैसलों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इनमें जम्मू-कश्मीर के लिए अनुच्छेद 370 को हटाने का निर्णय, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लोकतंत्र, भ्रष्टाचार, पर्यावरण और लैंगिक समानता जैसे संवैधानिक मुद्दों पर दिए गए अहम निर्णय शामिल हैं। खास बात यह है कि वे हाईकोर्ट से सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे, और उनकी न्यायिक समझ व अनुभव ने उन्हें सर्वोच्च पद के लिए विशेष रूप से योग्य बनाया।
जस्टिस सूर्यकांत कौन हैं?
10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे जस्टिस सूर्यकांत ने एक छोटे शहर के प्रैक्टिशनर से लेकर देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक की लंबी यात्रा तय की है। वे वर्षों से राष्ट्रीय महत्व के कई संवैधानिक मामलों और प्रमुख निर्णयों में शामिल रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2011 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से क़ानून में मास्टर डिग्री प्राप्त की, जिसमें वे 'फर्स्ट क्लास फर्स्ट' रहे।
जस्टिस सूर्यकांत 5 अक्टूबर 2018 से हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में भी सेवा दे चुके हैं। इससे पहले उन्होंने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में भी कई महत्वपूर्ण और मिसाल कायम करने वाले फैसले सुनाए थे।
जस्टिस सूर्यकांत के कुछ महत्वपूर्ण फैसले
सुप्रीम कोर्ट में रहते हुए उन्होंने अनुच्छेद 370, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिकता से जुड़े संवैधानिक मामलों पर महत्वपूर्ण निर्णय दिए, जो भारतीय संवैधानिक ढांचे को आकार देने में उनकी भूमिका को दर्शाते हैं।
वे हाल ही में राष्ट्रपति के संदर्भ वाले उस मामले की सुनवाई करने वाली बेंच का हिस्सा थे, जिसमें राज्यपाल और राष्ट्रपति की शक्तियों के दायरे को लेकर राज्यों द्वारा पारित विधेयकों पर महत्वपूर्ण विचार-विमर्श हुआ था। इस फैसले का कई राज्यों पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा।
एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में, उन्होंने चुनाव आयोग को बिहार की ड्राफ्ट मतदाता सूची से बाहर किए गए 6.5 मिलियन मतदाताओं की जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। यह निर्देश उस समय आया जब सुप्रीम कोर्ट राज्य चुनावों से पहले मतदाता सूची के विशेष संशोधन पर सुनवाई कर रहा था।