क्या आपको सेकेंड-हैंड फ़ोन खरीदना चाहिए या नहीं? अगर आप खरीदते हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें
अगर आप पुराना या सेकेंड-हैंड फ़ोन खरीदने की सोच रहे हैं, तो सावधानी बरतना बेहद ज़रूरी है। आजकल ऑनलाइन और ऑफलाइन बाज़ार में कई फ़ोन बिल्कुल नए दिखाई देते हैं, लेकिन उनमें छिपी हुई खामियाँ बाद में बड़ी समस्या बन सकती हैं। चोरी हुए फ़ोन, खराब बैटरी, नकली पुर्ज़े और ब्लैकलिस्टेड IMEI जैसी समस्याएँ आम हैं। इसलिए, कुछ ज़रूरी बातों की जाँच ज़रूरी है।
IMEI नंबर की जाँच करें:
पुराना फ़ोन खरीदने से पहले उसका IMEI नंबर जाँचना बेहद ज़रूरी है। किसी भी ऑनलाइन IMEI चेकर या सरकारी पोर्टल पर IMEI डालकर आप यह पता लगा सकते हैं कि फ़ोन ब्लैकलिस्टेड है या नहीं। चोरी हुए फ़ोन अक्सर बाज़ार में बिकते हैं, और IMEI के ज़रिए उनकी ट्रैकिंग की जाती है। ऐसे फ़ोन खरीदने पर बाद में पुलिस कार्रवाई हो सकती है। इसलिए, IMEI का मिलान और उसकी स्थिति की जाँच सबसे पहले करनी चाहिए।
फ़ोन की शारीरिक स्थिति और बॉडी पर ध्यान दें:
फ़ोन के बॉडी फ्रेम, स्क्रीन, कैमरा और बटनों की अच्छी तरह से जाँच करना ज़रूरी है। कभी-कभी, स्क्रीन बदलने या बॉडी पॉलिश करने से फ़ोन बिल्कुल नया जैसा दिखने लगता है। सूक्ष्म खरोंच, डेंट, टूटे हुए कैमरा ग्लास या रंगहीन स्क्रीन जैसे संकेत अत्यधिक उपयोग या गिरने का संकेत देते हैं। चार्जिंग पोर्ट और स्पीकर ग्रिल भी क्षति के सामान्य क्षेत्र हैं जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
बैटरी हेल्थ और चार्जिंग टेस्टिंग :
iPhone सेटिंग्स में बैटरी हेल्थ की जाँच की जा सकती है। बैटरी हेल्थ कम होने पर फ़ोन जल्दी डिस्चार्ज हो जाता है और ज़्यादा गरम भी हो सकता है। iPhone सेटिंग्स में बैटरी हेल्थ की जाँच की जा सकती है, जबकि Android डिवाइस में थर्ड-पार्टी टूल्स या सर्विस सेंटर रिपोर्ट का उपयोग करके बैटरी साइकिल काउंट और परफॉर्मेंस की जाँच की जा सकती है। धीमी चार्जिंग स्पीड या फ़ास्ट चार्जिंग का न होना भी खराब बैटरी के संकेत हैं।
कैमरा, स्पीकर, कॉलिंग और नेटवर्क :
फ़ोन खरीदने से पहले, सभी कैमरा मोड और फ़ोटो क्वालिटी की जाँच करें। कैमरा मॉड्यूल अक्सर बदल दिए जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप खराब परफॉर्मेंस होती है। कॉलिंग टेस्ट करके माइक्रोफ़ोन और स्पीकर दोनों की जाँच करना ज़रूरी है। इसके अलावा, सिम डालने के बाद नेटवर्क सिग्नल और 4G/5G कनेक्टिविटी की जाँच ज़रूर करें, क्योंकि कई फ़ोनों में नेटवर्क IC की समस्या होती है।
मूल बिल, बॉक्स और वारंटी :
सेकंड-हैंड फ़ोन खरीदते समय बिल, बॉक्स और वारंटी कार्ड का होना बहुत फ़ायदेमंद होता है। बिल से आपको फ़ोन के असली मालिक की पहचान करने में मदद मिलती है, और अगर वारंटी अभी भी जारी है, तो आप किसी भी समस्या के लिए सर्विस सेंटर से सहायता ले सकते हैं। अगर आपको बिल नहीं मिलता है, तो कम से कम मूल बॉक्स और IMEI का मिलान होना चाहिए। नकली एक्सेसरीज़ से बचने के लिए, चार्जर और केबल की भी जाँच करें।