बिहार में नीतीश कुमार ने पलटा रुख, महागठबंधन की निकली हवा, जानिए कैसे?
बिहार में 'कमज़ोर कड़ी' बन चुके नीतीश कुमार ने विपक्ष पर कैसे पलटवार किया?
बिहार विधानसभा चुनाव में एक बार फिर एनडीए की सरकार बनने जा रही है। चुनाव से पहले सत्ता विरोधी लहर और महागठबंधन द्वारा 'कमज़ोर कड़ी' बताए जा रहे नीतीश कुमार ने एक अनोखी रणनीति अपनाकर चुपचाप बाजी पलट दी है। जेडीयू ने बीजेपी से ज़्यादा सीटें जीतकर साबित कर दिया है कि बिहार के मतदाताओं का भरोसा 'सुशासन बाबू' पर अब भी कायम है।
नकद हस्तांतरण का 'मास्टरस्ट्रोक'
एनडीए की इस जीत में सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक बिहार सरकार द्वारा चुनावों की घोषणा से पहले किया गया डायरेक्ट कैश ट्रांसफर रहा। चुनावों की घोषणा से पहले, बिहार सरकार ने 75 लाख महिलाओं के खातों में सीधे 10-10 हज़ार रुपये ट्रांसफर किए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना की शुरुआत की थी। लाभार्थी महिलाओं की संख्या देखते ही देखते एक करोड़ को पार कर गई। महागठबंधन ने इस राशि को ऋण या अनुदान बताकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन मतदाताओं पर इसका कोई असर नहीं हुआ।
डायरेक्ट कैश ट्रांसफर का यह सफल प्रयोग मध्य प्रदेश समेत दूसरे राज्यों में भी सफल रहा है। तेजस्वी यादव ने जीविका दीदियों के लिए 30,000 रुपये वेतन और सरकारी नौकरी का विज्ञापन दिया था, लेकिन लोगों ने वादे से ज़्यादा रसीद (बाद में मिलने वाले लाभ) पर भरोसा किया।
महिला मतदाताओं ने शराबबंदी को मंजूरी दी
नीतीश कुमार की जीत में महिला मतदाताओं की अहम भूमिका रही है, जिसकी मुख्य वजह शराबबंदी है। 2015 के चुनाव में जब महिलाओं के एक कार्यक्रम में यह माँग उठी थी, तो नीतीश कुमार ने सत्ता में वापसी पर पूर्ण शराबबंदी लागू करने का वादा किया था, जिसे उन्होंने पूरा भी किया। शराबबंदी पर सवाल उठने के बावजूद, नीतीश कुमार अपने वादे पर अड़े रहे। प्रशांत किशोर ने सरकार बनने पर शराबबंदी खत्म करने की बात कही थी। हालाँकि, जनादेश साफ़ दर्शाता है कि बिहार की जनता, खासकर महिलाएँ, शराबबंदी को बरकरार रखना चाहती हैं।
'सुशासन बाबू' की छवि पर भरोसा
2002 से नीतीश कुमार ने जनता के बीच 'सुशासन बाबू' के रूप में जो छवि बनाई है, वह नतीजों में साफ़ दिखाई दे रही है। बिहार में बिजली व्यवस्था में सुधार और राज्य के कोने-कोने तक पहुँचती अच्छी सड़कों ने लोगों को यह विश्वास दिलाया है कि विकास की गति जारी रहेगी।
चुनाव से पहले हुई हत्या की घटनाओं ने कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे, लेकिन नीतीश कुमार ने भाजपा के साथ मिलकर विपक्ष को 'जंगलराज' की याद दिलाकर इस मुद्दे को बेअसर कर दिया। इतना ही नहीं, नीतीश कुमार की छवि 'पलटू राम' के रूप में बनी होने के बावजूद, जदयू नेता ने अपने काम के दम पर सभी सवालों का जवाब दिया है।