मंदिरों में ‘प्रसाद’ से तबाही की साजिश! गुजरात एटीएस ने किया बायोकैमिकल आतंक का पर्दाफाश

मंदिरों में ‘प्रसाद’ से तबाही की साजिश! गुजरात एटीएस ने किया बायोकैमिकल आतंक का पर्दाफाश
JHB TEAM JHBNEWS टीम,सूरत 2025-11-13 14:07:39

संक्षेप में..... 

गुजरात एटीएस ने तीन आतंकियों को गिरफ्तार कर खुलासा किया है कि वे दिल्ली, लखनऊ और अहमदाबाद के मंदिरों में ‘प्रसाद’ में घातक रसायन रिसिन मिलाकर सैकड़ों श्रद्धालुओं की हत्या की साजिश रच रहे थे। आतंकी अफगान हैंडलर से संपर्क में थे और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के ज़रिए ‘रिसिन’ तैयार करने की ट्रेनिंग ली थी।

अब ख़बर विस्तार से.......

गुजरात एटीएस द्वारा किए गए एक बड़े ऑपरेशन में अहमदाबाद से गिरफ्तार तीन आतंकियों ने सनसनीखेज खुलासा किया है। खोरासन मॉड्यूल से जुड़े डॉक्टर मोहिउद्दीन, लखीमपुर खीरी के सोहेल और शामली के आज़ाद सैफी ने पूछताछ में कबूल किया कि वे दिल्ली, लखनऊ और अहमदाबाद के प्रमुख मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं को निशाना बनाने की तैयारी कर रहे थे। इन आतंकियों की योजना मंदिरों में मिलने वाले ‘प्रसाद’ में घातक रासायनिक पदार्थ रिसिन मिलाकर बड़े पैमाने पर लोगों की हत्या करने की थी।

सूत्रों के मुताबिक, तीनों आरोपी अफगानिस्तान में स्थित अपने हैंडलर अबू खादीजा के सीधे संपर्क में थे। उनके मोबाइल फोन से रिसिन बनाने की विधि, मंदिरों की रेकी से जुड़े फोटो और वीडियो बरामद हुए हैं। गिरफ्तारी के समय उनके पास से रिसिन का एक खतरनाक स्टॉक भी बरामद किया गया, जिसे जैविक हथियार की श्रेणी में रखा जाता है।

पूछताछ में सामने आया कि सोहेल और आज़ाद ने पिछले कुछ महीनों में लखनऊ के हनुमान सेतु मंदिर, अहमदाबाद के जगन्नाथ मंदिर और दिल्ली के कई धार्मिक स्थलों की रेकी की थी। योजना थी कि त्योहारों या भीड़भाड़ के अवसर पर वितरित किए जाने वाले प्रसाद में रिसिन मिलाकर श्रद्धालुओं को नुकसान पहुंचाया जाए। यह रासायनिक पदार्थ अत्यंत घातक है और इसकी कुछ मिलीग्राम मात्रा भी व्यक्ति की जान लेने के लिए पर्याप्त है। आतंकियों ने स्वीकार किया कि उनके हैंडलर ने उन्हें धार्मिक स्थलों पर हमला करने और समाज में भय और विभाजन फैलाने के निर्देश दिए थे।

डॉ. मोहिउद्दीन पेशे से डॉक्टर हैं और रासायनिक ज्ञान के कारण मॉड्यूल के तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में कार्य कर रहे थे। वे रिसिन के निर्माण और भंडारण के लिए जिम्मेदार थे। सोहेल और आज़ाद ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मदरसों से हाफ़िज़ की शिक्षा प्राप्त की थी और बाद में इंटरनेट पर फैली कट्टरपंथी विचारधाराओं से प्रभावित होकर खोरासन मॉड्यूल से जुड़े।

विशेषज्ञों का कहना है कि रिसिन एक अत्यंत घातक जैविक हथियार है, जो अरंडी के बीज से तैयार किया जाता है। इसे सांस के ज़रिए, निगलकर या इंजेक्शन से शरीर में पहुंचाया जा सकता है। वर्ष 1978 में इसी ज़हर से बुल्गारियाई असंतुष्ट लेखक जॉर्जी मार्कोव की हत्या की गई थी।

इस साजिश के खुलासे के बाद यूपी, गुजरात, दिल्ली और केंद्र की एजेंसियां अलर्ट पर हैं। यूपी एटीएस की टीम अभी भी गुजरात में डेरा जमाए हुए है और लखीमपुर, शामली, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर में आरोपियों के नेटवर्क की जांच जारी है। एटीएस को शक है कि इस मॉड्यूल में और भी लोग शामिल हो सकते हैं जिन्हें प्रशिक्षण और फंडिंग दी जा रही थी।

फरीदाबाद से गिरफ्तार डॉ. मुझम्मिल, डॉ. शाहीन शाहिद और उनके भाई डॉ. परवेज की पूछताछ में भी खुलासा हुआ कि उनके निशाने पर अयोध्या का राम मंदिर और वाराणसी का काशी विश्वनाथ मंदिर था। डॉ. शाहीन ने अयोध्या में अपने स्लीपर सेल को सक्रिय किया था और 6 दिसंबर को हमला करने की योजना थी, लेकिन इससे पहले ही सुरक्षा एजेंसियों ने इस नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया।

दिल्ली में हालिया कार ब्लास्ट की घटना के बाद इन आतंकियों की गिरफ्तारी से स्पष्ट है कि खोरासन मॉड्यूल भारत में जैविक आतंकवाद फैलाने की कोशिश में था। एटीएस ने जब्त रासायनिक पदार्थ को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है, जिससे इस खतरनाक साजिश के और कई रहस्य खुलने की उम्मीद है।