“मैंने अपने बेटे को कभी नहीं देखा, वह अब 20 साल का है, कुलदीप सिंह ने अपनी जान को जोखिम में डाल कर 80 लोगो की बचाई जान

“मैंने अपने बेटे को कभी नहीं देखा, वह अब 20 साल का है, कुलदीप सिंह ने अपनी जान को जोखिम में डाल कर 80 लोगो की बचाई जान
Khushbu rajput JHBNEWS टीम,सूरत 2025-11-11 20:46:31

10 नवंबर को दिल्ली में एक बड़ा धमाका हुआ जिसमें 12 लोगों की जान चली गई। इसके साथ ही इसमें 29 लोग घायल हुए। जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। ये दिल्ली का धमाका 2005 में हुए दिल्ली सीरियल बम ब्लास्ट की याद दिलाता है। हालांकि एक व्यक्ति के बहादुरी से 80 से अधिक यात्रियों की जान बच गई थी। आज उन्हें एक हीरो के तौर पर याद किया जाता है।

आज हम बात करेंगे कुलदीप सिंह के बारे में, कुलदीप सिंह को आज लोग हीरो के तौर पर याद करते है। दअरसल कुलदीप सिंह ने साल 2005 के दिल्ली सीरियल बम धमाकों में 80 से ज़्यादा लोगों की जान बचाई थी। उन्होंने अपनी बस में बम मिलने पर यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला और खुद बम को दूर ले गए, जिससे वह घायल हो गए और उन्होंने अपनी आँखों की रोशनी खो दी।

दिवाली से ठीक दो दिन पहले, बम धमाकों की आवाज़ ने शहर को हिलाकर रख दिया। 62 लोगों की जान चली गई थी, सैकड़ों घायल हुए थे। लेकिन इस अफरा-तफरी के बीच, एक बस ड्राइवर ने इंसानियत की मिसाल कायम की। उस समय कुलदीप सिंह दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) में ड्राइवर थे।

जब उनकी बस में बम मिला, तो उन्होंने बिना सोचे-समझे सभी यात्रियों को बस से नीचे उतार दिया। और खुद बम उठाकर दूर लेकर चले गए। जिसके बाद बड़ा धमाका हुआ। इस धमाके में उन्होंने अपनी आँखों की रोशनी, एक हाथ और सुनने की शक्ति खो दी। लेकिन 80 से ज़्यादा लोगों की जान बचाई।

कुलदीप कहते हैं:

“मैंने अपने बेटे को कभी नहीं देखा, वह अब 20 साल का है। लेकिन मुझे गर्व है कि मैंने इतने सारे लोगों की जान बचाई।” आज 20 साल हो गए हैं। आज जब फिर से धमाकों की खबर आती है, तो हमें याद आता है। जब दिल्ली दहल रही थी, तब कुछ लोगों ने बहादुरी से इंसानियत को बचाया था।