बिहार तेजाब हत्या कांड, आज भी चंदा बाबू के बेटों की हत्या देश को झकझोर देता है

बिहार तेजाब हत्या कांड, आज भी चंदा बाबू के बेटों की हत्या देश को झकझोर देता है
Khushbu rajput JHBNEWS टीम,सूरत 2025-11-08 18:34:26

बिहार: बिहार के सिवान का वो तेजाब कांड आज भी लोगों के रोंगटे खड़े कर देता है। कुख्यात बाहुबली शहाबुद्दीन ने रंगदारी न देने पर चंदा बाबू के दोनों बेटों सतीश और गिरीश को तेजाब से नहलाकर मार डाला था और चश्मदीद राजीव की भी हत्या कर दी थी। 

बिहार के सिवान का तेजाब हत्या कांड बिहार के इतिहास का सबसे खौफनाक और सनसनीखेज हत्याकांड था। यह हत्याकांड रंगदारी की मांग से शुरू हुआ लेकिन इसका अंत एक परिवार की तीन बेटों की दर्दनाक मौत से हुआ था। आपको बता दे की हत्या के तरीके और आरोपी के नाम में इस केस को देश का सबसे चर्चित मामला बना दिया था। आरोपी का नाम था पूर्व सांसद और बाहुबली नेता मोहम्मद शाहबुद्दीन जिसके नाम से पूरा सिवान डरता था। यह बिहार का वह दौर था जब अपराधी खुलेआम घूमता था।

चंदा बाबू साल 2004 से पहले सिवान में अपने पत्नी और 2 बेटी और 4 बेटो के साथ सुख शांति से रहते थे। उनकी एक किराने की दुकान थी। उनका सबसे छोटा बेटा नीतीश विकलांग था। और वो ज्यादातर घर पर ही रहता था। इसके बाद इस कहानी में शहाबुद्दीन की एंट्री हुई। 1990 के दशक से। आपको बता दे कि शहाबुद्दीन आरजेडी से 4 बार सांसद रह चुका था। सिवान वाली कोठी पर कोर्ट लगती थी। जहां पर फैसले सुनाए जाते है। इतना ही नहीं मामले निपटाए भी जाते थे। सांसद की रंगदारी की मांग ने चंदा बाबू के सुख चैन में आग लगा दी।

सुबह शहाबुद्दीन के गुर्गे ने चंदा बाबू सहित अन्य पांच लोगों की दुकान पर पहुंचे। वहां जाके उसने सभी से रंगदारी की मांग की, रंगदारी के लिए उसने 2.5 लाख की मांग की। लेकिन चंदा बाबू ने रंगदारी देने से साफ तौर पर मना कर दिया। हालांकि सतीश ने 30 से 40 हजार देने की बात कही, लेकिन शहाबुद्दीन के गुर्गे ने लेने से मना कर दिया।

हथियारों से सुसज बदमाशों ने मार पीट शुरू कर दिया। सतीश ने बचाव में तेजाब का मग लेकर गुर्गे पर फेक दिया। इससे वहां अफरा तफरी मच गई। उस समय वहां से सतीश को गुंडों ने पकड़ लिया। दुकान में भी आग लगा दी।

कहा जाता है कि तीनों भाईयों को शहाबुद्दीन की कोठी पर ले जाया गया। ये भी कहा जाता था कि वहां पर शाहबुद्दीन भी मौजूद था, जो फैसला सुनाया। उसके फैसले के बाद उसके गुर्गे ने सतीश और गिरीश के ऊपर बाल्टी से भारी तेजाब डाल दी। दोनों ने तड़प तड़प कर अपने भाई की आंख के सामने दम तोड़ दिया। इतना ही नहीं यह दरिंदगी यही नहीं खत्म हुई सतीश और गिरीश की लाशों को टुकड़ों में काटकर बोरी में भरा गया और फिर उन दोनों को नदी में फेंक दिया गया। रोता भी बिलखता राजू इस वारदात का इकलौता गवाह था, लेकिन इसके बावजूद उसे जिंदा छोड़ दिया गया। ताकि चंदा बाबू को धमकाया जा सके उसे दिन चंदा बाबू अपने भाई के पास पटना गए थे।

इसके बाद चंदा बाबू का पूरा परिवार बिखर चुका था। इस वारदात के बाद चंदा बाबू को किसी ने फोन कर बताया कि आप सिवान मत आए नहीं तो मार दिए जाओगे बताया गया कि दो बेटे मारे गए हैं, तीसरा कैद में है। राजीव दो दिनों बाद गने से लदे ट्रैक्टर में छिपकर उत्तर प्रदेश के पडरौना पहुंचा। वहां पर स्थानीय सांसद के घर में शरण ली। लेकिन बाद में खबर मिली कि वह भी मर गया। इसके बाद चंदा बाबू को भी लालच देकर सिवान बुलाने की भी साजिश रची गई। चंदा बाबू जब बड़े नेता संसद से मिले तो उन्होंने भी इस केस से अपना पला झाड़ लिया। बदमाशों ने चंदा बाबू के पटना वाले भाई को भी धमकी दे डाली।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इसे धमकियों से परेशान होकर चंदा बाबू भटकने लगे उनकी स्थिति साधु संतों जैसी हो गई। हालांकि इसके बाद डीजीपी को पत्र लिखा। आईजी डीआईजी से एसपी तक चिट्टियां गई लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं कि यहां तक दिल्ली आ गए। दिल्ली आने के बाद राहुल गांधी से मुलाकात की लेकिन वहां भी सिर्फ आश्वासन मिला कोई मदद नहीं।

साल 2004 की तेजाब कांड में शहाबुद्दीन के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत केस दर्ज हुआ लेकिन गिरफ्तारी नहीं हुई। इसके साथ ही साल 2005 में बिहार की सत्ता बदली नीतीश कुमार की सरकारआई तब जाकर सांसद बाहुबली शहाबुद्दीन पर दबाव बढ़ने लगा और जून 2005 में उसे दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। यह लड़ाई बरकरार रही। प्राप्त जानकारी के अनुसार 9 दिसंबर 2015 के दिन अदालत ने शहाबुद्दीन,राजकुमार शाह, शेख असलम और आरिफ उर्फ सोनू को तेजाब कांड डबल मर्डर का दोषी ठहराया गया और 11 दिसंबर को है उम्र कैद की सजा सुनाई गई।

यह लड़ाई 15 साल तक चली साल 2019 में उनकी पत्नी का देहांत हो गया उसके बाद 2020 में दिल का दौरा पड़ने से चंदा बाबू का भी निधन हो गया नीतीश अकेला बचा जो विकलांग है। यह कहानी तब खत्म हुई जब कोरोना आया और 1 में 2021 को कोरोना में शहाबुद्दीन की मौत हो गई। यह केस आज भी लोगों के रोंगटे खड़े कर देता है।