बारिश के बीच आस्था का सैलाब: सूरत में लाखों श्रद्धालुओं ने छठ महापर्व पर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित किया

बारिश के बीच आस्था का सैलाब: सूरत में लाखों श्रद्धालुओं ने छठ महापर्व पर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित किया
Shubham Pandey JHBNEWS टीम,सूरत 2025-10-27 19:05:59

सूरत शहर में आज आस्था, भक्ति और उत्साह का अनोखा संगम देखने को मिला है उत्तर भारतीय समाज के लाखों श्रद्धालुओं ने बारिश भरे वातावरण के बावजूद परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ छठ महापर्व मनाया। अस्त होते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के लिए महिलाएं, बच्चे और पुरुष दोपहर से ही पूजा स्थल पर पहुंचने लगे थे। शहर के विभिन्न घाटों, तालाबों नहरों और घर पर छठ मैया के गीतों की गूंज और भक्ति का माहौल छा गया।

हर वर्ष की तरह इस बार भी सूरत महानगरपालिका और सामाजिक संस्थाओं द्वारा छठ पूजा के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। सूर्य पुत्री तापी नदी के तट पर, डिंडोली छठ तालाब, अमरोली, वेदरोड, पांडेसरा, हजीरा वोवारा और अठवा सहित कई क्षेत्रों में पूजा के लिए विशेष घाट बनाए गए थे। हालांकि मौसम की मार और बीच-बीच में हुई वर्षा के कारण कई श्रद्धालुओं ने नहर किनारे और अन्य सुरक्षित स्थानों पर पूजा का आयोजन किया। फिर भी श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। महिलाओं ने निर्जला उपवास रखकर पूरे विधि-विधान से सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित किया और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

छठ महापर्व का महत्व:

छठ पर्व लोक आस्था का सबसे पवित्र और कठिन व्रत माना जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है, लेकिन आज यह देशभर में उत्तर भारतीय समाज की पहचान बन चुका है। सूरत जैसे औद्योगिक शहर में भी पिछले कई वर्षों से लाखों लोग इसे एक भव्य उत्सव की तरह मनाते हैं।

इस पर्व की विशेषता इसकी सादगी, शुद्धता और पर्यावरण से जुड़ाव में निहित है। चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य जैसे चार मुख्य चरण होते हैं। इस दौरान भक्तजन न केवल उपवास रखते हैं, बल्कि अपने मन और शरीर को भी पवित्र बनाए रखते हैं।

सूर्यदेव की पूजा क्यों की जाती है:

छठ पूजा में सूर्य भगवान की उपासना इसलिए की जाती है क्योंकि वे जीवन के स्रोत हैं। वैदिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्यदेव स्वास्थ्य, ऊर्जा, और समृद्धि के प्रतीक हैं। उनके प्रकाश से पृथ्वी पर जीवन संभव है। ऐसा विश्वास है कि सूर्यदेव को अर्घ्य देने से रोग, दुःख और संकट दूर होते हैं तथा परिवार में सुख-शांति और संतति की वृद्धि होती है।

सूरत के घाटों पर जब हजारों दीपक जल उठे और महिलाएं ‘छठी मइया’ के गीतों के साथ अर्घ्य दे रही थीं, तब ऐसा प्रतीत हुआ मानो पूरी तटरेखा श्रद्धा और भक्ति से आलोकित हो उठी हो। यह दृश्य न केवल मनमोहक था, बल्कि आस्था की अटूट शक्ति का प्रतीक भी बना रहा।