सूरत : माता-पिता ने 13 साल की बेटी को बताया माता का अवतार, बेटी को बनाया पैसे ऐंठने का संसाधन
सूरत के वेलंजा इलाके में समाज के लिए एक बेहद शर्मनाक और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहाँ माता-पिता अपनी ही बेटी को पिछले 10 सालों से 'माता जी का अवतार ' बनाकर श्रद्धालुओं से ठगी कर रहे थे। इस घटना का पर्दाफाश गुजरात जन विज्ञान जत्थे ने किया है।
बेटी को बनाया पैसा कमाने का जरिया
वेलंजा में रहने वाले प्रियाबेन और जयसुखभाई बरवालिया नामक दंपत्ति ने अपनी लगभग 13 साल की बेटी को महज 3 साल की उम्र में 'माताजी का अवतार' घोषित कर दिया और उसे बांसुरी बजाना सिखाया। वे अपनी बेटी के नाम पर भोले-भाले श्रद्धालुओं से मोटी रकम वसूल रहे थे।
भूमि का दर्द सामने आया
यह पूरा कांड तब उजागर हुआ जब नाबालिग बेटी ने जन विज्ञान जत्थे के सामने अपना दर्द बयां किया। जब नाबालिग बेटी 'माता का अवतार' का नाटक बंद करने की बात अपने माता पिता से कहती तो वो लोग उसके साथ दुर्व्यवहार करते थे उसके माता-पिता भड़क जाते और उसके साथ मार-पीट करते थे।
गंभीर धोखाधड़ी का पर्दाफाश
यह दम्पति पिछले 10 सालों से इसी तरह धोखाधड़ी कर रहा था। प्रियाबेन ने सात बच्चों को जन्म दिया था, जिनमें से चार जीवित हैं। ये लोग दूर पति-पत्नी को बेटियाँ देने के नाम पर उनसे मोटी रकम वसूलते थे.
जत्थे का सफल पर्दाफाश और पुलिस कार्रवाई
जन विज्ञान जत्थे का यह 1278वाँ सफल पर्दाफाश है। जत्थे के हस्तक्षेप और समझाने के बाद, प्रियाबेन और जयसुखभाई बरवालिया ने आधिकारिक तौर पर अपने धोखाधड़ी के गोरखधंधे को बंद करने की घोषणा की है। जत्थे ने इस पूरे मामले में उत्कृष्ट और त्वरित कार्रवाई के लिए सूरत पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत और उतराण पुलिस स्टेशन के कर्मचारियों सहित वरिष्ठ अधिकारियों का आभार व्यक्त किया है। इस घटना ने अंधविश्वास के नाम पर बच्चों के शोषण और धन कमाने के लिए माता-पिता द्वारा स्वयं बनाए जा रहे 'संसाधन ' के भ्रष्टाचार के बारे में गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।