सूरत के सरकारी स्कूल में नॉन-वेज पार्टी, प्रिंसिपल ने कहा, 'मुझे नहीं पता है बाहर से कोई लाया है'

सूरत के सरकारी स्कूल में नॉन-वेज पार्टी, प्रिंसिपल ने कहा, 'मुझे नहीं पता है बाहर से कोई लाया है'
Shubham Pandey JHBNEWS टीम,सूरत 2025-10-13 20:05:23

सूरत के गोडादरा इलाके में सूरत नगर निगम द्वारा संचालित नगर प्राथमिक शिक्षा समिति के स्कूल नंबर 342, पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्राथमिक विद्यालय में रविवार को छुट्टी के दिन गेट-टू-गेदर कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। जिसमें दोपहर के भोजन में चिकन परोसा गया था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था । स्कूल के बाहर तेलुगु में एक बैनर भी लगाया गया था, जिस पर लिखा था, "वर्ष 1987 से 1991 बैच के पूर्व छात्रों का स्नेह मिलन समारोह।" सरस्वती का निवास माने जाने वाले स्कूल में इस तरह नॉनवेज परोसकर सरस्वती के निवास की गरिमा को ठेस पहुँचाई गई।

सूरत के गोडादरा इलाके में सूरत नगर निगम द्वारा संचालित नगर प्राथमिक शिक्षा समिति स्कूल क्रमांक 342 पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्राथमिक विद्यालय में रविवार को छुट्टी के दिन गेट टू गेदर कार्यक्रम में हुई चिकन पार्टी को लेकर उपजे विवाद के बाद शिक्षा समिति ने स्कूल के प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया है। उधर, प्रिंसिपल ने अपना बचाव करते हुए कहा है कि पार्टी केवल शिक्षकों और कुछ कर्मचारियों के लिए थी, जिसमें छात्रों को अनिवार्य रूप से शामिल होने के लिए नहीं कहा गया था। हालांकि, छात्रों की उपस्थिति और नॉन-वेज परोसे जाने से विवाद और भड़क गया है। स्कूल प्रबंधन समिति ने मामले की जांच शुरू कर दी है और कहा है कि अगर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो उचित कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, शिक्षा विभाग ने भी इस मामले में प्राथमिक जानकारी मांगी है। स्कूल प्रशासकों की बैठक बुलाकर और जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

सूरत लिंबायत स्थित एक नगर निगम द्वारा संचालित स्कूल के प्रिंसिपल ने कर्मचारियों और कुछ छात्रों के लिए नॉन-वेज पार्टी का आयोजन किया था। यह कार्यक्रम स्कूल परिसर में ही आयोजित किया गया था। हालाँकि, जब यह पता चला कि स्कूल एक धर्मनिरपेक्ष संस्थान होने के बावजूद मांसाहारी भोजन परोस रहा था, तो कुछ अभिभावकों ने इसे शैक्षणिक माहौल के लिए "अनुचित" बताया है। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल एक ऐसी जगह है जहाँ विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के छात्र पढ़ते हैं। ऐसे में मांसाहारी भोजन का आयोजन कई धर्मों की भावनाओं को ठेस पहुँचाता है। यह मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया है, जहाँ लोग प्रिंसिपल के इस कदम को अनुचित और संस्थान की छवि धूमिल करने वाला बता रहे हैं।