Surat: 100 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी के मामले में ईडी ने 4 लोगों को किया गिरफ्तार, जाने पूरा मामला?

Surat: 100 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी के मामले में ईडी ने 4 लोगों को किया गिरफ्तार, जाने पूरा मामला?
Shubham Pandey JHBNEWS टीम,सूरत 2025-10-10 23:20:19

गुजरात में 100 करोड़ रुपए की साइबर ठगी का पर्दाफाश हुआ है, जिससे पूरे राज्य में हड़कंप मच गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत सूरत से डॉक्टर पिता-पुत्र समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि यह गिरोह “डिजिटल अरेस्ट”, फर्जी नोटिस और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए ठगी का बड़ा नेटवर्क चला रहा था।

चार आरोपी गिरफ्तार

ईडी ने गुजरात में साइबर अपराध से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में मकबूल अब्दुल रहमान उर्फ डॉक्टर, उसका बेटा काशिफ मकबूल, महेश मफतलाल देसाई और ओम राजेंद्र पांड्या शामिल हैं। ये सभी देशभर में लोगों को फर्जी सरकारी कार्रवाई और कानूनी नोटिस भेजकर ठगते थे।

ईडी की बड़ी कार्रवाई

ईडी अधिकारी के मुताबिक, यह कार्रवाई सूरत के उप-क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई। डॉक्टर अपने बेटे और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर संगठित तरीके से साइबर ठगी रैकेट चला रहा था। कभी ये लोग खुद को ईडी या सीबीआई अधिकारी बताते, तो कभी सुप्रीम कोर्ट के नाम पर फर्जी नोटिस भेजते। वे लोगों को सरकारी कार्रवाई के डर से पैसे ट्रांसफर करवाने के लिए मजबूर करते थे।

ठगी के पैसे को छिपाने का जाल

आरोपियों ने ठगी से हुई कमाई को छिपाने के लिए कर्मचारियों, सहयोगियों और भाड़े के लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए और उन्हीं खातों में ठगी के पैसे जमा करवाए। कुल राशि 100 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है।

ईडी की जांच में सामने आया कि गिरोह ने इन पैसों को वैध दिखाने के लिए जटिल वित्तीय लेनदेन, क्रिप्टोकरेंसी में रूपांतरण और हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल किया।

डिजिटल अरेस्ट और डर का धंधा

यह गैंग “डिजिटल अरेस्ट”, विदेशी निवेश और कानूनी नोटिस जैसे झांसे देकर लोगों को फंसाता था। वे फोन कॉल, फर्जी वेबसाइट और ईमेल के जरिए शिकार चुनते, फिर सरकारी एजेंसी की कार्रवाई का डर दिखाकर रकम वसूलते थे।

सूरत पुलिस की एफआईआर से खुली परतें

यह मामला सूरत पुलिस के विशेष अभियान समूह (SOG) द्वारा अक्टूबर 2024 में दर्ज की गई एफआईआर से जुड़ा हुआ है। उसी केस के आधार पर ईडी ने मनी ट्रेल की जांच शुरू की थी, जिसके बाद चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की जांच जारी

ईडी अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों, हवाला चैनलों और क्रिप्टो एक्सचेंज से जुड़े लिंक की जांच कर रही है। सूत्रों का कहना है कि इस नेटवर्क के तार विदेश तक फैले हो सकते हैं।

गुजरात में हुई इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि अब साइबर ठगी महज फोन कॉल या लिंक भेजने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह टेक्नोलॉजी और वित्तीय अपराध का संगठित नेटवर्क बन चुकी है।