प्रेग्नेंसी में आप भी कर रही है ये गलती तो बच्चे का दिमाग हो सकता है कमजोर!
माँ बनना हर एक महिला का सपना होता है, जब वो प्रेग्नेंट होती है तो वह सोचती है की उनका होने वाला बच्चा स्वस्थ हो, कोई भी माँ ये नहीं चाहती है की उसका बच्चा मंदबुद्धि का हो. उसका बच्चा तेज दिमाग वाला हो. देखिये जब एक स्त्री गर्भवती होती है तो वो अपने साथ ही अपने होने वाले बच्चे को लेकर कई सपने सजोती है, अपना ध्यान भी बहुत अच्छे से रखती है जिसे बच्चे का विकास सही तरिके से हो. लेकिन बावजूद इसके जाने-अनजाने में कई बार ऐसी गलती हो जाती है, जिसका सीधा असर उनके होने वाले बच्चे पर होता है. ये बात सभी को पता है की माँ जो भी करती है उसका असर सीधा बच्चे पर पड़ता है
दसरल कई दफा माँ अपना ध्यान रखती है लेकिन फिर भी उसे ऐसी गलतिया हो जाती है जिसका असर होने वाले बच्चे पर पड़ता है. जिससे बच्चे का दिमाग और इम्यून सिस्टम खतरे में पड़ जाता है. इसलिए बहुत जरूरी है कि वह किस बात का ध्यान रखे जिसे बच्चा स्वस्थ हो उसका दिमाग और इम्यून सिस्टम भी सही रहे. चलिए जानते है गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. आरिया रैना से।
गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. आरिया रैना ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है जिसमे वह बताती है की अक्सर प्रेग्नेंट महिलाएं गलत तरिके से अपना डाइट लेती है जिसका असर सीधा बच्चे के दिमाग और इम्यून सिस्टम दोनों को खतरा होता है. इसलिए गर्भवती महिलाओं को अपना सबसे पहले डाइट को सही करना चाहिए उन पर विशेष रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है.
डॉ. रैना अपने वीडियो में प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए दो डाइट प्लान शेयर करती है और कहती है की सबसे पहले गर्भवती महिलाओं को लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फूड्स या फिर पूरी तरह से ग्रेन्स लेने चाहिए। लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स में फल (सेब, संतरा, अमरूद, जामुन), दालें (राजमा, छोले, मसूर), सब्जियां (ब्रोकोली, पालक, गाजर), कुछ अनाज (जौ, ब्राउन राइस, ओट्स) और डेयरी उत्पाद (स्किम्ड दूध, दही) का समावेश होता है. इसके साथ ही महिलाओं को रिफाइंड कार्ब्स और प्रोसेस्ड फूड्स को नहीं लेना चाहिए जब वह प्रेग्नेंट होती है तब। इसमें रिफाइंड अनाज(सफेद ब्रेड, मैदा, सफेद चावल, पास्ता), मिठाइयाँ
(केक, कुकीज, पेस्ट्री, मिठाइयाँ, डोनट्स), मीठे पेय (सोडा और एनर्जी ड्रिंक्स), स्नैक्स(चिप्स, वेफर्स और कुछ स्नैक्स)इत्यादि का समावेश होता है. वहीँ डॉ. रैना आगे बताती है कि प्रेग्नेंट महिलाओ को वाइट ब्रेड और पॉलिश्ड राइस भी अपने डाइट में शामिल नहीं करना चाहिए।
डॉक्टर कहती हैं कि रिफाइंड फूड्स ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाने में मदद करते हैं और इससे जेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। रिसर्च के अनुसार, प्रेग्नेंसी में महिलाओं को लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फूड्स और हेल्दी कार्ब्स ही लेना चाहिए, जैस की ज्वार, रागी, बाजरा और बीन्स। इन फूड्स को खाने से प्रेग्नेंट महिलाओं में जेस्टेशनल डायबिटीज का रिस्क काफी हद तक कम हो जाता है। साथ ही अपने खाने का प्रोटीन, आयरन और विटामिन C का सही कॉम्बिनेशन भी रखना जरूरी चाहिए।
जेस्टेशनल डायबिटीज क्या है ?
गर्भावस्था के दौरान होने वाला एक प्रकार का मधुमेह है जो प्लेसेंटा द्वारा उत्पादित हार्मोन के कारण होता है, जिससे शरीर इंसुलिन का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाता है। इससे रक्त शर्करा का स्तर बढ़ जाता है। यह प्रसव के बाद ठीक हो जाता है, लेकिन माँ और बच्चे दोनों में भविष्य में टाइप 2 मधुमेह और मोटापे का खतरा बढ़ जाता है।
जेस्टेशनल डायबिटीज के जोखिम और जटिलताएँ
माँ के लिए: उच्च रक्तचाप (प्रीक्लेम्पसिया), सिजेरियन डिलीवरी, और प्रसव संबंधी अन्य समस्याओ का खतरा बढ़ जाता है।
बच्चे के लिए: जन्म के समय बहुत बड़ा शिशु (मैक्रोसोमिया), जन्म के दौरान चोट, और भविष्य में मोटापे या टाइप 2 मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है।