गुजरात में 892 करोड़ का साइबर घोटाला बेनकाब, सूरत से 10 आरोपी गिरफ्तार

गुजरात में 892 करोड़ का साइबर घोटाला बेनकाब, सूरत से 10 आरोपी गिरफ्तार
Khushbu rajput JHBNEWS टीम,सूरत 2025-09-26 16:40:37

हाल के वर्षो में साइबर धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़ रहे है साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए, गांधीनगर स्थित स्टेट राज्य साइबर क्राइम सेल ने सूरत शहर में 892 करोड़ रुपये के एक बहुत बड़े और व्यापक रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसमें सूरत जिले से 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जो कथित तौर पर एक राष्ट्रव्यापी घोटाला गिरोह के मास्टरमाइंड थे।

पुलिस ने बताया कि आरोपी सुविधाकर्ता के रूप में काम कर रहे थे, फर्जी बैंक खाते, सिम कार्ड, पीओएस (पॉइंट-ऑफ-सेल) मशीन और अन्य डिजिटल उपकरण उपलब्ध करा रहे थे, जिसके जरिए साइबर धोखाधड़ी करने वाले देशभर के लोगो को लूट सकते थे. यह रैकेट ऑनलाइन वित्तीय फर्मों के नाम पर लोगों को ठगने में शामिल था। पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपियों ने इन धोखाधड़ी गतिविधियों के लिए कुल 482 बैंक खातों का इस्तेमाल किया। यह घोटाला इतना व्यापक था कि राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 पोर्टल पर इसके संबंध में 1,549 ऑनलाइन शिकायतें दर्ज की गईं, जिसके आधार पर देश भर के विभिन्न राज्यों में 22 मामले दर्ज किए गए।

साइबर क्राइम टीम ने आरोपियों के कार्यालयों और आवासों पर छापेमारी करके भारी मात्रा में धनराशि जब्त की है, जो घोटाले की गंभीरता को दर्शाता है। जब्त की गई वस्तुओं में निम्नलिखित शामिल हैं , स्टेट साइबर सेल ने आरोपियों के पास से 9 बैंक खाता किट, 447 एटीएम कार्ड, 686 प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड, 16 बीएच9 मशीन, 60 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, 11 साउंड बॉक्स, 1722 कोड और एक राउटर जब्त किया है। गुजरात साइबर क्राइम की इस समय पर की गई कार्रवाई ने करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है।

पुलिस ने बताया कि गिरोह ने 482 म्यूल अकाउंट बनाए थे जिनके ज़रिए जालसाज़ों ने देश भर में 1,549 साइबर अपराध किए, जिनमें अकेले गुजरात में 141 मामले शामिल हैं, जिनकी कीमत 17.75 करोड़ रुपये है। साइबर क्राइम अधिकारियों ने बताया कि यह हाल के वर्षों में हुई सबसे बड़ी कार्रवाई में से एक है। क्राइम साइबर सेल आगे की रिमांड के लिए आरोपियों को अदालत में पेश करेगी क्योंकि इस रैकेट के अंतरराष्ट्रीय घोटाले में तब्दील होने का संदेह है।

आरोपियों से गांधीनगर स्थित स्टेट साइबर सेल मुख्यालय में पूछताछ की जा रही है, जहाँ अधिकारियों का मानना है कि गिरोह कई अन्य धोखाधड़ी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। एक अधिकारी ने बताया कि ये लोग सिर्फ़ निष्क्रिय मददगार नहीं थे। उन्होंने सिम से लेकर क्यूआर कोड तक एक पूरा तंत्र बनाया जिससे स्केमर्स पूरे भारत में आसानी से काम कर सके। अब तक, विभिन्न राज्यों में 22 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, जिनमें गुजरात में तीन (दो अहमदाबाद में और एक मोरबी में) शामिल हैं।

यह गिरोह स्केमर्स को उपकरण और पहचान पत्र मुहैया कराने में माहिर था। कमीशन के लिए, वे सिम कार्ड, इंटरनेट एक्सेस, बैंक खाते और डिजिटल उपकरण मुहैया कराते थे, जिनका इस्तेमाल डिजिटल गिरफ़्तारी, निवेश धोखाधड़ी, फ़र्ज़ी लोन और जमा योजनाओं, यूपीआई और भुगतान ऐप धोखाधड़ी, और घर से काम करने या पार्ट-टाइम नौकरियों जैसे घोटालों में किया जाता था।