सूरत: छत्रपति शिवाजी के कार्यकाल का देसी माटी अखाड़ा जो आज भी कार्यरत, जानिए इसका रहस्य
भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और शारीरिक परंपराओं में व्यायाम शालाओं और अखाड़ों का विशेष स्थान रहा है। यह केवल शारीरिक स्वास्थ्य को मजबूत करने का केंद्र नहीं होता, बल्कि आत्मअनुशासन, संयम और मानसिक दृढ़ता को विकसित करने का एक माध्यम भी होता है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, सूरत शहर में 1929 में श्री सुखानंद महाराज ने ही व्यायाम शाला की स्थापना की थी। यह सूरत का पहला देशी अखाड़ा है जिसकी माटी अखाड़ा से जाना जाता है, जो आज भी अपनी विरासत को संजोए हुए है और 300 से अधिक युवाओं को व्यायाम की प्रेरणा दे रहा है।
सूरत, जो व्यापार और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है, वहाँ 1929 के दशक में शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर अधिक जागरूकता नहीं थी। जिम और फिटनेस सेंटर का प्रचलन उतना व्यापक नहीं था। ऐसे समय में श्री सुखानंद महाराज जी ने देशी व्यायाम पद्धति को लोकप्रिय बनाने और युवाओं को सशक्त करने के उद्देश्य से श्री सुखानंद व्यायाम शाला की स्थापना की।
आज के दौर में, जब डिजिटल जीवनशैली और भागदौड़ भरी जिंदगी के कारण शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है, तब इस प्रकार के पारंपरिक व्यायाम शालाओं का महत्व और भी बढ़ जाता है। श्री सुखानंद व्यायाम शाला सूरत की एक अनमोल धरोहर है, जो भविष्य में भी स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेगी।
पूर्वजों द्वारा बताया जाता है कि जब छत्रपति शिवाजी महाराज सूरत आए थे तब वह पुरानी मां अंबाजी मंदिर में दर्शन किए थे और एक बहुत बड़ी सुरंग भी बनाई थी जो श्री सुखानंद व्यायाम साला में आज भी वह सुरंग का स्थापित है जो चौटा पुल के पास तापी नदी में निकलता है
इस व्यायाम शाला का मुख्य उद्देश्य था—युवाओं को पारंपरिक व्यायाम तकनीकों, मल्लखंभ, कुश्ती, योग, और अन्य शारीरिक कलाओं से परिचित कराना नहीं बल्कि शारीरिक तंदुरुस्ती और वेशन से दूर रहने की तकनीक भी सिखाया जाता है यह व्यायाम शाला धीरे-धीरे स्वास्थ्य और शारीरिक मजबूती का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया।
श्री सुखानंद व्यायाम शाला में मुख्य रूप से भारतीय पारंपरिक व्यायाम सिखाए जाते हैं, जिनमें मल्लखंभ, दंड-बैठक, गदा अभ्यास, कुश्ती, और योग शामिल हैं। ये सभी व्यायाम न केवल शरीर को मजबूत बनाते हैं, बल्कि मानसिक शांति और आत्मनियंत्रण भी प्रदान करते हैं।
यह अखाड़ा युवाओं के लिए एक आदर्श केंद्र बना हुआ है। यहाँ प्रतिदिन 300 से अधिक युवा अभ्यास करने आते हैं। यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है, बल्कि खेलों में रुचि रखने वाले युवाओं को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताओं के लिए भी तैयार करता है।
श्री सुखानंद व्यायाम शाला में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को अनुशासन और समर्पण का पालन करना होता है। यहाँ व्यायाम के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और आत्मसंयम का भी विशेष ध्यान दिया जाता है।
यहाँ कुश्ती और मल्लखंभ का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। मल्लखंभ एक प्राचीन भारतीय व्यायाम प्रणाली है, जिसमें व्यक्ति रस्सी या लकड़ी के खंभे का उपयोग करके कलाबाजी करता है। यह शरीर की लचक और संतुलन को बढ़ाने में मदद करता है।
हालांकि यह एक देशी अखाड़ा है, यानि कि माटी अखाड़ा से जाना जाता है लेकिन यहाँ समय के साथ कुछ आधुनिक फिटनेस तकनीकों को भी शामिल किया गया है, ताकि युवा पीढ़ी को लाभ मिल सके। इसमें डाइट चार्ट, योगाभ्यास, ध्यान (मेडिटेशन), और साइंटिफिक वर्कआउट को भी शामिल किया गया है।
सुखानंद महाराज जी का योगदान
सुखानंद महाराज जी ने इस व्यायाम शाला की स्थापना केवल एक केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि एक मिशन के रूप में की थी। उनका उद्देश्य युवाओं को नशे और अन्य बुरी आदतों से दूर रखना और उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था। उनके प्रयासों के कारण ही आज यह व्यायाम शाला एक महत्वपूर्ण विरासत बन गई है।
उन्होंने जीवनभर योग और व्यायाम को प्रोत्साहित किया और सैकड़ों विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया। उनके शिष्यों ने विभिन्न खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और कई राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया।
श्री सुखानंद व्यायाम शाला का वर्तमान स्वरूप
आज के समय में, जब लोग आधुनिक जिम और फिटनेस सेंटर की ओर आकर्षित हो रहे हैं, तब भी श्री सुखानंद व्यायाम शाला की लोकप्रियता बनी हुई है। यह केवल व्यायाम करने का स्थान नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक और शारीरिक विकास का केंद्र भी है।
यह व्यायाम शाला अभी भी युवाओं को आकर्षित कर रही है। यहाँ आने वाले युवाओं को न केवल व्यायाम सिखाया जाता है, बल्कि अनुशासन, कड़ी मेहनत, और आत्मनिर्भरता का भी पाठ पढ़ाया जाता है।
श्री सुखानंद व्यायाम शाला प्रत्येक वर्ष कुश्ती और मल्लखंभ प्रतियोगिताओं का आयोजन करती है, जिसमें सूरत और आसपास के क्षेत्रों से प्रतिभागी भाग लेते हैं। ये आयोजन शारीरिक शिक्षा को बढ़ावा देने और युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए किए जाते हैं।